अमेठी : विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमयेमाफी में चिकित्सक न होने से यहां गंभीर रूप से बीमार मरीज आने से कतराते हैं। ऐसे मरीज बाहर ही इलाज कराने को विवश हैं। सरकारी अस्पताल की जिम्मेदारी एक फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय के भरोसे है, जिससे मरीजों को अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। पीएचसी पर मंगलवार को फार्मासिस्ट शिवभूषण शुक्ल, वार्ड ब्याय जियालाल भारती ने मरीजों के चिकित्सा की जिम्मेदारी संभाली। आठ बजे से दो बजे तक यहां सिर्फ 19 मरीज आए थे। फार्मासिस्ट ने बताया कि डायरिया, खांसी, बुखार, दाद, खाज, खुजली सामान्य किस्म के मरीज इलाज कराने आए थे। पीएचसी पर लैब असिसटेंट यानि की प्रयोगशाला सहायक की तैनाती नहीं है, जिससे मरीजों के खून आदि की जांचें नहीं हो पाती हैं। चिकित्सक न होने से पीएचसी में गंभीर किस्म के बीमार मरीज अन्य अस्पतालों में इलाज कराने को विवश हैं। एमओसीएच मेडिकल आफीसर कम्युनिटी हेल्थ की भी यहां तैनाती नहीं है, जिससे आर्युवेद चिकित्सक को दिखाने की मंशा लेकर अस्पताल आए मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ता है। स्वीपर न होने से अस्पताल परिसर की सफाई नहीं हो पाती है। अस्पताल के अंदर की सफाई फार्मासिस्ट और वार्डब्याय जैसे तैसे कर लेते हैं, पर परिसर में गंदगी की सफाई कराना मुश्किल है।

-यह है तैनाती का मानक चिकित्सक 01 फार्मासिस्ट 01 एमओसीएच 01 लैब असिस्टेंट 01 स्वीपर 01 -अधिकारी बोले मुख्य चिकित्साधिकारी डा सीमा मेहरा ने बताया कि उनके पास जो संसाधन हैं, उसी से मरीजों का उपचार किए जाने का प्रयास किया जाता है। जल्द ही पीएचसी पर चिकित्सक की तैनाती की जाएगी।

Edited By: Jagran