अमेठी : किसानों को लगातार पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। बावजूद इसके पराली जलाने की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही है।

सरकारी आकड़ों पर गौर करें तो जिले में अब तक 33 किसानों ने पराली जलाई है। जबकि जमीन पर देखें तो गांव-गांव इतनी संख्या में लोगों ने अपने खेतों में पराली जलाई होगी। सिस्टम ने 33 में से दो किसानों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पांच हजार रुपये जुर्माना भी वसूल किया गया है।

पर्यावरण प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए पराली जलाने पर रोक लगा दी गई है। रोक के बावजूद पराली जलाने की घटनाएं देखी जा रही है। जिले में अब तक 33 किसानों ने धान फसल काटने के बाद पराली जला दी। जिसे सैटेलाइट के माध्यम से पकड़ा गया। तिलोई ब्लाक में सबसे ज्यादा आठ किसानों ने पराली जलाई है। तो वहीं भादर व संग्रामपुर में अभी तक एक भी पराली जलाने की घटना सामने नहीं आई। जिले में तिलोई के बाद मुसाफिरखाना में पांच, भेटुआ में चार, बाजारशुकुल व सिंहपुर में तीन-तीन, गौरीगंज, जामो, भेट़ुआ व जगदीशपुर में दो-दो व शाहगढ़ में एक किसान ने पराली जलाई है। जिसे सैटेलाइट के माध्यम से पकड़ा गया है। पराली जलाने पर बाजारशुकुल के दो किसानों पर कार्रवाई करते हुए पांच हजार रुपये का जुर्माना वसूल किया गया है।

-पराली जलाने की बजाय उसे गलाने पर दे ध्यान

जिला कृषि अधिकारी अखिलेश कुमार पांडेय ने बताया कि पराली जलाने से प्रदूषण फैलता है। भूमि में पल रहे जीव, मित्र कीट, पोषक तत्व जलकर नष्ट हो जाते है। ऐसे में किसान खेतों में पड़ी पराली को न जलाएं। बल्कि उसे खेत में दबाकर जुताई करा दे। जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी।

Edited By: Jagran