अमेठी : चार माह में युवा जिलाधिकारी प्रशांत शर्मा के कई रंग जिले ने देखे और कई किस्से भी सार्वजनिक हुए। साहब ने जितनी गरिमा गिराई उतनी पहले कभी नहीं गिरी थी। प्रशांत शर्मा जिले के पहले ऐसे जिलाधिकारी रहे, जिनके विरोध में जन समुदाय मुखर हुआ औरसोशल मीडिया पर आवाम ने अपनी भड़ास निकाली। जनता की पीड़ा सामने आते ही केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी ट्वीट कर कड़ी नसीहत देते हुए लिखा कि ''जनता के हम सेवक हैं, शासक नहीं।'' इसके बाद जिले में सरकारी अमले की कार्यशैली में तेजी से बदलाव आया पर वह भी कुर्सी बचा पाने में नाकाम साबित हुआ। डीएम के रूप में प्रशांत ने सेना भर्ती रैली, अयोध्या मामले में अमन कायम रखने के साथ ही सरकारी स्कूलों के कायाकल्प सहित कई बड़े काम किए, लेकिन बदजुबानी में उनकी काबिलियत छिप गई। जनतंत्र की बात सरकार तक पहुंची तो साहब की साख बची न ही कुर्सी।

बैठकों में ऊंचे रिश्तों की दिखाते धमक

प्रशांत शर्मा सरकारी बैठकों में रिश्तों की धमक दिखाते हुए अधिकारियों को फटकारने से नहीं चूकते थे। कार्यालय व आवास में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ भी उनका व्यवहार दूसरे जिलाधिकारियों की तरह नहीं था।

पहली बार किसानों से हुई भिड़ंत

प्रशांत की पहली भिड़त किसानों से हुई वह भी किसान दिवस के दिन। साहब के दफ्तर से कई बार किसानों को अंदर बाहर किया गया। इसी दौरान एक किसान बेहोश हो गया। इस बात पर किसान भड़क गए। इसके बाद तो हर दिन साहब के नए-नए किस्से सार्वजनिक होने लगे।

Posted By: Jagran

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