अमेठी (दिलीप सिंह)। वह घड़ी करीब है जिसका अमेठी को वर्षों से इंतजार था। 450 करोड़ की लागत से बनकर तैयार राजीव गांधी पेट्रोलियम संस्थान हमेशा सियासी रार की वजह बना रहा। पहले 1996 में पीवी नरसिम्हा राव सरकार ने अमेठी में आयल रिफाइनरी प्रोजेक्ट लगाने का फैसला किया था। कालांतर में कांग्रेस के नेतृत्व वाली मनमोहन सरकार ने रिफाइनरी प्रोजेक्ट से हाथ पीछे खींचते हुए राजीव गांधी पेट्रोलियम संस्थान बनाने का निर्णय लिया। पहले वाले निर्णय के समय राजीव गांधी के बाल सखा कैप्टन सतीश शर्मा देश के पेट्रोलियम मंत्री थे तो दूसरे निर्णय के समय कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी के सांसद। और अब जब दशकों पुराना सपना जमीन पर हकीकत बनकर उतरा है तो एक बार फिर सियासी रार ने पेट्रोलियम संस्थान की उपयोगिता को पीछे छोड़ दिया है।

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कांग्रेस और भाजपा दोनों ही संस्थान के उपयोगिता से ज्यादा खुद के प्रचार प्रसार व आगामी विधानसभा चुनाव में संस्थान के सहारे वोट बटोरने की जुगत में लग गए हैं। 80 के दशक में जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र में आयल रिफाइनरी व पेट्रोलियम संस्थान खोलने का निर्णय लिया था। समय ने साथ नहीं दिया। उनकी असमय मौत हो गई। उसके बाद उनके सखा कैप्टन सतीश शर्मा अमेठी से सांसद बने और पीवी नरसिम्हा राव सरकार में पेट्रोलियम मंत्री तो उन्होंने राजीव गांधी के सपनों को हकीकत में पहली बार तब्दील करने का फैसला लिया। फरवरी 1996 को जायस में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने आयल रिफाइनरी प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया। 18 फरवरी 1996 में ही सलोन के छतोह में पेट्रोलियम टेक्निकल स्कूल का शिलान्यास तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री कैप्टन सतीश शर्मा ने किया। उम्मीदें जगी, लेकिन वह हकीकत में तब्दील नहीं हो पाई। 2004 में राहुल गांधी अमेठी के सांसद बने तो उन्होंने जायस में पेट्रोलियम संस्थान खोलने का ड्रीम प्रोजेक्ट बनाया।

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राहुल का ड्रीम प्रोजेक्ट 2007 में यूपीए सरकार में पास हुआ और 20 फरवरी 2008 को गांधी-नेहरू परिवार की मौजूदगी में तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री ने एक बार फिर उसी भूमि पर शिलान्यास किया जहां 1996 में शिलान्यास हुआ था। इसको लेकर उस समय खूब सियासी हमले भी कांग्रेस पर हुए। 2008 से 2016 तक शायद ही कोई ऐसा महीना बीता हो जब किसी न किसी रूप में पेट्रोलियम संस्थान चर्चा में न रहा हो। मोदी सरकार बनने के बाद भाजपाइयों ने पेट्रोलियम संस्थान के निर्माण में लगी एजेंसी पर निर्माण में गोल-माल करने का आरोप लगाया तो पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जांच के आदेश भी दिए। जिसे कांग्रेसियों ने निर्माण में रोड़ा अटकाना बताते हुए खूब हाय तौबा मचाई।

कांग्रेसियों ने जगह-जगह लगाए पोस्टर

झूठे वादे नहीं, पक्के इरादे। धन्यवाद, आभार, अभिनंदन जैसे पोस्टर कांग्रेसियों ने जगह-जगह लगाकर सांसद राहुल गांधी को राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान की सौगात देने के लिए बधाइयां दी हैं। बैनर में संस्थान के भवनों के साथ ही राहुल गांधी की भी फोटो लगाई गई है। इतना ही नहीं इस पोस्टर को वाट्सएप, फेसबुक पर भी खूब वायरल किया जा रहा है।

जरा इनकी भी सुनिए

कांग्रेस जिलाध्यक्ष योगेंद्र मिश्र कहते हैं कि अमेठी में जो कोई भी विकास कार्य हुआ है वह गांधी नेहरू परिवार का ही किया हुआ है। ढोल पीटने से कुछ भी नहीं होता। अमेठी सब समझती है। वहीं स्मृति ईरानी के पीआरओ विजय गुप्ता कहते हैं कि वक्त बदलता है। मोदी सरकार में दीदी के प्रयास से हुए विकास कार्यों का लाभ अमेठी की जनता को मिलने लगा है।

पहली बार होगा कांग्रेस के गढ़ में मजबूत विरोध

वैसे तो अमेठी-रायबरेली में अब तक सभी दल कांग्रेस को या यह कहें कि गांधी-नेहरू परिवार को वाक ओवर देते आ रहे थे तो गलत नहीं होगा। लेकिन वर्ष 2014 में हुए आम चुनाव में राहुल-स्मृति के मुकाबले ने अमेठी के सियासी परिदृश्य को बदल दिया है। अब यहां सब कुछ एक तरफा नहीं रहा। पहली बार शनिवार को एक साथ मोदी सरकार के तीन मंत्री अमेठी में होंगे। ऐसा अब तक कांग्रेस की सरकार में ही हुआ करता था। जब दिल्ली की पूरी सरकार गांधी नेहरू परिवार के पीछे अमेठी-रायबरेलीमें खड़ी रहती थी।

Edited By: Nawal Mishra