विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अमेठी में 6.40 करोड़ के गबन में पुलिस की कार्रवाई सुस्त, एक गिरफ्तारी के बाद ठंडी पड़ी जांच

Published: Tue, 29 Sep 2026 12:43 PM (IST)

भारतीय स्टेट बैंक की अमेठी शाखा में 6.40 करोड़ रुपये के ऋण धोखाधड़ी मामले में डेढ़ महीने बाद भी पुलिस की कार्रवाई सुस्त है।

News Article Hero Image

HighLights

  1. अमेठी एसबीआई में 6.40 करोड़ रुपये का ऋण धोखाधड़ी मामला।

  2. पुलिस ने डेढ़ महीने में केवल एक आरोपी को गिरफ्तार किया।

  3. मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

जागरण संवाददाता, अमेठी। भारतीय स्टेट बैंक की अमेठी शाखा से जुड़े करीब 6.40 करोड़ रुपये के ऋण धोखाधड़ी मामले में डेढ़ महीने बाद भी पुलिस की कार्रवाई अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ सकी है।

मुकदमे में नामजद 12 आरोपितों में से महज एक की गिरफ्तारी के बाद अन्य आरोपितों की धरपकड़ न होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। खासकर मुख्य नामजद आरोपितों के अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहने को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं।

फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों के ऋण का आरोप

18 अगस्त को एसबीआइ अमेठी शाखा के मुख्य प्रबंधक राहुल सिंह की तहरीर पर पुलिस ने राजीव गांधी पालिटेक्निक संस्थान के प्रबंधक, निदेशक, प्रधानाचार्य और कार्यालय सहायक समेत 12 नामजद आरोपितों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

आरोप है कि संस्थान से जुड़े जिम्मेदार लोगों ने फर्जी नियुक्ति पत्र और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बैंक से भारी-भरकम ऋण हासिल किया और करीब 6.40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।

कार्यालय सील, एक गिरफ्तारी और फिर कार्रवाई की रफ्तार थमी

मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने 22 अगस्त को विवेचक संजीव कुमार के नेतृत्व में आरोपी संस्थान का कार्यालय सील किया था। इसके बाद दो सितंबर को मूंघी निवासी नामजद आरोपित अजय कुमार तिवारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

यह भी पढ़ें- 'वह रायबरेली-अमेठी जाएंगे तो हम भी जा सकते हैं कन्नौज-इटावा', सपा प्रमुख के दौरे पर अजय राय का पलटवार

लेकिन इसके बाद 11 अन्य नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। डेढ़ महीने का समय गुजरने के बावजूद मुख्य आरोपितों तक पुलिस का न पहुंच पाना अब जांच की दिशा और कार्रवाई की गति पर सवाल खड़े कर रहा है।

फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की जाएगी। मुख्य आरोपितों के शिकंजे में आने के बाद बैंक दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा। प्रकरण में जिसकी भी संलिप्तता सामने आएगी, उसके खिलाफ कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अतुल कुमार सिंह, सीओ-मुसाफिरखाना