अमेठी में आंख से हाजिरी लगने पर श्रमिकों को करना पड़ेगा काम, पलायन को मजबूर हो रहे जॉब कार्ड धारक
मनरेगा में आंख से हाजिरी लगने से मजदूरों और ग्राम पंचायतों को परेशानी हो रही है। अब काम पर जाना अनिवार्य होगा, जिससे मजदूरी में हेराफेरी रुकेगी।

आंख से हाजिरी लगने पर श्रमिकों को करना पड़ेगा काम।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, बाजारशुकुल (अमेठी)। आंख से मनरेगा में लगने वाली हाजिरी को लेकर जाब कार्ड धारक मजदूर तो परेशान हैं ही साथ ही इससे ग्राम पंचायतें भी सकते में आ गई हैं। क्योंकि अब मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को काम पर जाना जरूरी होगा। बगैर काम पर पहुंचे उनका फोटो अपलोड नहीं होगी, जिससे उन्हें मजदूरी के लाले पड़ जाएंगे।
इतना ही नहीं मजदूरी के नाम पर मनरेगा में हेराफेरी करने वाली ग्राम पंचायतें भी अब बगैर काम पर मजदूर आए मजदूरी नहीं निकाल सकेंगी। एक अप्रैल से लागू होने जा रही वीबीजी रामजी योजना के नियम व शर्ते भी ग्राम पंचायतों को मानक पर खरा उतरने के लिए मजबूर करेंगी।
इसके लागू होने में अब मात्र तीन दिन का समय बाकी बचा है। ग्रामीणों का कहना है कि इसके लागू होने के बाद पंचायतों को मजदूर ढूंढ़ने में पसीना छूटेगा। क्योंकि रोजगार देने के नाम पर मजदूरी में खेला करने वाली पंचायतें एक अप्रैल के बाद ऐसा नहीं कर पाएंगी।
पलायन को मजबूर हो रहे जॉबकार्ड धारक
आए दिन मनरेगा में बदलते नियमों से परेशान जॉबकार्ड धारक मजदूर गांव से शहरों की और पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। तरह तरह के नियम व कम मजदूरी इनके पलायन का मुख्य कारण बन सकती है। इन्हें आज भी मात्र 252 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दिए जाने का प्रावधान है, जबकि इसके विपरीत इन्हें प्राइवेट सेक्टर में काम करने पर तीन से पांच सौ रुपये तक की दैनिक मजदूरी मिल रही है।
समय से नहीं मिलती मजदूरी
मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को समय से मजदूरी न मिलना एक बड़ी समस्या है। इन्हें काम करने के बाद महीनों मजदूरी नहीं मिलती जिससे उनके तमाम जरूरी काम बाधित हो जाते हैं।
मजदूर मिलना बनी चुनौती
मनरेगा के बदलते नियम व कम मजदूरी के चलते धीरे धीरे मजदूर मिलना एक बड़ी चुनौती बन गई है। अब मजदूर मनरेगा में काम करने से कतराने लगे हैं। उनका मानना है कि उन्हें न तो समय पर मजदूरी मिलती है न ही काम। मिलता भी है तो तमाम नियम कानून। इससे आजिज आकर वह मनरेगा से मुंह मोड़ते जा रहे हैं।
होली के बाद से आंख से हाजिरी लग रही है। एक अप्रैल से मनरेगा का नाम बदल जाएगा। हालांकि अभी तक कोई नई गाइड लाइन उन्हें नहीं मिली है। काम के लिए मजदूर मिलने की समस्या जरूर है। वर्तमान में 54 ग्राम पंचायतों में लगभग 150 मजदूर ही काम कर रहे हैं। -प्रमोद कुमार यादव, एपीओ मनरेगा, बाजारशुकुल।
