जागरण संवाददाता, गौरीगंज (अमेठी): खानपान में ध्यान न देने से किडनी के मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। दूषित खानपान से कम उम्र में ही लोग यकृत के रोगी हो रहे हैं। औसतन एक दिन में किडनी के 10 से 12 मरीज संयुक्त जिला अस्पताल में उपचार कराने के लिए आ रहे हैं। नवंबर महीने में किडनी के 393 मरीजों की डायलिसिस हुई है। चिकित्सक की सलाह पर एक हफ्ते में एक मरीज की दो से तीन बार डायलिसिस की जाती है। शुक्रवार को छह रोगी अस्पताल में भर्ती मिले। 

तीन चार घंटे की डायलिसिस के बाद वार्ड से मरीजों को बाहर किया जाता है। जहां उनके तीमारदार मरीजों को लेकर घर चले जाते हैं। जिले के दयालापुर निवासी किडनी के मरीज रामचंद्र तिवारी, श्याम बहादुर, देवकली निवासी हसीना, भुसियावां निवासी अमित, अमेठी निवासी गंगाबक्श व मुसाफिरखाना निवासी हसनउल्ला का वार्ड में उपचार चल रहा है। 

सीनियर टेक्नीशियन डायलिसिस अंकित शुक्ल की तैनाती वार्ड में की गई है। वे अपने सहयोगी टेक्नीशियन चित्रांश, विजय, शिवम शुक्ल, नर्स नीतू र्मार्य के साथ प्रभावित रोगियों के रक्त का शोधन कृत्रिम विधि से करते हैं। 

अंकित शुक्ल बताते हैं कि एमडी मेडिसिन के सलाह पर मरीजों की डायलिसिस की जाती है। इस दौरान जिस चिकित्सक का मरीज रहता है, उसी की देखेरेख में यह प्रक्रिया पूरी की जाती है। 

अस्पताल में लगाई गई हैं छह मशीनें 

जिला अस्पताल में मरीजों की डायलिसिस के लिए छह मशीनें लगाई गई हैं। सभी मशीनें क्रियाशील हैं। जहां शिफ्टवार मरीजों का उपचार किया जाता है। इसके पहले चिकित्सक शुभम पांडेय, नीरज वर्मा, अमित यादव प्रभावित व्यक्ति का परीक्षण करते हैं।

बोले अधिकारी

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. बीपी अग्रवाल ने बताया कि खानपान दूषित होने के कारण यकृत के रोगियों में इजाफा हाे रहा है। अक्सर देखा जा रहा है कि खानपान की गड़बड़ी से 40 साल की उम्र में ही लोग किडनी के मरीज हो रहे हैं। वार्ड में छह बेड हैं। एक बेड एचआइवी पीड़ित के लिए है। चिकित्सक शुभम पांडेय वार्ड के प्रभारी बनाए गए हैं।

Edited By: Shivam Yadav

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