सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट की सारी बाधाएं खत्म, अमेठी में गुरु गोरखनाथ तपोस्थली बनेगी धार्मिक पर्यटन केंद्र
अमेठी में गुरु गोरखनाथ तपोस्थली के जीर्णोद्धार और पर्यटन विकास का कार्य जिलाधिकारी के प्रयासों से पुनः शुरू हो गया है।

पहली तस्वीर AI जेनेरेटेड है
HighLights
गुरु गोरखनाथ तपोस्थली का जीर्णोद्धार कार्य पुनः आरंभ हुआ।
जिलाधिकारी के प्रयासों से तकनीकी बाधाएं समाप्त हुईं।
14 करोड़ रुपये से परिसर का विकास और सौंदर्यीकरण होगा।
संवाद सूत्र, अमेठी। गुरु गोरखनाथ तपोस्थली के जीर्णोद्धार और पर्यटन विकास का कार्य पुनः आरंभ हो गया है। महीनों से रुके निर्माण की सभी तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं जिलाधिकारी संजय चौहान के प्रयासों से समाप्त हो गई हैं। कार्यदाई संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने साइट पर मशीनें और श्रमिक भेज दिए हैं। पहले चरण में निर्माण पर 14 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
निर्माण रुकने से स्थानीय लोगों में परियोजना के अधर में लटकने की चिंता थी। अब काम शुरू होने से लोगों में तपोस्थली के नए स्वरूप की उम्मीद जगी है। नगर निवासी धर्मेंद्र वर्मा ने कहा कि यह स्थान लोगों की आस्था और पहचान से जुड़ा है।
काम फिर से शुरू होने से सभी खुश हैं। गुरु दयाल सोनी ने कहा कि तपोस्थली के विकास से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। राम प्यारे और संतोष कुमार रागिया ने कहा कि वर्षों की उपेक्षा के बाद अब इस ऐतिहासिक स्थल को नया स्वरूप मिलने जा रहा है।
परियोजना के तहत तपोस्थली परिसर की बाउंड्रीवॉल, पर्यटकों की सुविधा के लिए टूरिज्म फैसिलिटी सेंटर और दो आधुनिक शौचालय ब्लॉक का निर्माण किया जाएगा। नौ मीटर चौड़ा भव्य प्रवेश द्वार और अलग निकास द्वार भी होगा।
इसके अलावा, दो गजीबो और परगोला का निर्माण, प्राचीन सरोवर का जीर्णोद्धार, खुदाई और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। सरोवर के बीच गुरु गोरखनाथ की विशाल प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जो परिसर का प्रमुख आकर्षण होगी। बारादरी, मुख्य मंदिर और समाधि स्थल का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद तपोस्थली को धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
प्राचीन है गुरु गोरखनाथ तपोस्थली
स्थानीय मान्यता के अनुसार, नाथ संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु गोरखनाथ ने यहां लंबे समय तक तपस्या की थी, जिससे इस स्थान को तपोस्थली कहा जाता है। यह स्थान मलिक मोहम्मद जायसी के समय से भी पुराना माना जाता है।
मान्यता है कि गुरु गोरखनाथ ने यहां हठ योग की साधना की और अपने शिष्यों को योग की शिक्षा दी। परिसर में स्थित समाधि स्थल और प्राचीन सरोवर को भी इसी परंपरा से जोड़ा जाता है।
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स्थानीय लोग सरोवर के जल को पवित्र मानते हैं। समय के साथ उपेक्षा के कारण तपोस्थली का पुराना वैभव प्रभावित हुआ, जिसे अब विकास परियोजना के माध्यम से नया स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
शासन स्तर से परियोजना से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें दूर कर दी गई हैं। परियोजना की कुल लागत करीब 14 करोड़ रुपये है और इसे 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरवर अली, अवर अभियंता-कार्यदाई संस्था
