त्योहारी सीजन में बिगड़ा रसोईं का बजट, दालें 20 रुपये हुईं महंगी; अरहर 145 तो उड़द 150 के पार
त्योहारी मौसम में दालों की कीमतों में 10-20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम परिवारों का रसोई बजट बिगड़ गया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
दालों के दाम 10-20 रुपये प्रति किलो बढ़े।
अरहर 145 रुपये, उड़द 150 रुपये प्रति किलो हुई।
त्योहारी मांग और फसल नुकसान से कीमतें बढ़ीं।
संवाद सूत्र, अमेठी। त्योहारों के मौसम में दालों की कीमतों में भारी उछाल आया है। पिछले दिनों विभिन्न दालों के दाम 10 से 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। इससे आम परिवारों का रसोई बजट बिगड़ गया है और मध्यवर्गीय परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों में कटौती करनी पड़ रही है।
बाजार में अरहर की दाल 145 रुपये प्रति किलो बिक रही है। उड़द की दाल का भाव 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। सब्जियों की महंगाई के बीच दाल-रोटी पर निर्भर लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कारोबारियों का कहना है कि त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने से दालों के भाव में तेजी आई है।
उपभोक्ताओं की चिंता भी बढ़ गई है। व्यापारी मनोज कुमार और बृजेश कुमार ने बताया कि मौसम में उतार-चढ़ाव और बारिश से फसलों को नुकसान हुआ है। बाजार में दालों की मांग अधिक है, लेकिन आवक कम है। यह भी कीमत बढ़ने का एक प्रमुख कारण है। जिससे रसोई का बजट बिगड़ रहा है।
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कीमतों में वृद्धि के कारण और प्रभाव
मौसम में बदलाव और बारिश के कारण दालों की फसलें प्रभावित हुई हैं। इससे बाजार में दालों की आपूर्ति कम हो गई है। त्योहारों के दौरान बढ़ी हुई मांग ने भी कीमतों को ऊपर धकेला है। इस महंगाई से खासकर मध्यवर्गीय परिवारों को अपनी दैनिक जरूरतों में कटौती करनी पड़ रही है।
दाल रोजमर्रा के भोजन का जरूरी हिस्सा है। पहले से ही सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों के दाम बढ़े हुए हैं। अब दालें भी महंगी होने से महीने का बजट संभालना मुश्किल हो गया है।- उर्मिला देवी, गृहिणी
त्योहारों के समय घर का खर्च वैसे ही बढ़ जाता है। ऐसे में दालों के दाम बढ़ने से परेशानी और बढ़ गई है। महंगाई के चलते अब जरूरी सामान खरीदने से पहले सोचना पड़ता है।- रोली बरनवाल, गृहिणी
त्योहारों के दौरान घर की जरूरतों पर खर्च बढ़ जाता है। इस बीच दालों की कीमतों में उछाल ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। सीमित आमदनी में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है और महंगे सामान के कारण बचत करना भी कठिन हो गया है।- उषा मौर्य, गृहिणी
महंगाई ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में खरीदारी करने जाते समय अब हर चीज का हिसाब लगाना पड़ता है। दाल जैसी रोजमर्रा की खाद्य सामग्री महंगी होने से भोजन का खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है।- माधुरी यादव, गृहिणी
