अंबेडकरनगर : स्थानीय तहसील क्षेत्र स्थित नदियां, नाले, तालाब सूख गए हैं। जिससे जलस्तर नीचे चला गया। हैंडपंप से पानी निकलना बंद होने लगा है। नतीजतन पेयजल संकट की दस्तक गांवों में सुनाई देने लगी है। इन सूखे जल स्त्रोतों में बच्चे क्रिकेट खेलते हैं। भीटी तहसील क्षेत्र से होकर मड़हा, बिसुही, मझुई नदियां प्रवाहित होती हैं। इसके अलावा अभिलेखों के मुताबिक तहसील के 257 गांवों में 1994.619 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में तालाब स्थित हैं। इसमें तालाबों की संख्या 3252 दर्शायी गई है। इन तालाबों को पूर्ववर्ती सपा सरकार ने आदर्श जलाशय बनाने के लिए करोड़ों रूपये खर्च किया है। सरकार का उद्देश्य इनमें हमेशा ग्राम पंचायत के माध्यम से पानी भरे रहने के साथ इसे रमणीक बनाना था। इसक्रम में तालाबों के सुंदरीकरण के नाम पर गेट, बेंच, फूल पत्तियां आदि के लिए भी लाखों रूपये खर्च हुए। इसके साथ ही मछली पालन के माध्यम से मछुआ समुदाय के लोगों को रोजगार देना, जल संचय कर जलस्तर दुरुस्त रखना भी था, लेकिन सत्ता बदलते ही पूर्ववर्ती सरकार की मंशा जमींदोज हो गई। जलाशय जंगल, झाड़ियों से अच्छादित हो गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 85 फीसद तालाब सूखे हुए हैं। ऐसे में जलस्तर नीचे जाना स्वाभविक है। इससे जंगली व चरने वाले पालतू जानवरों को तालाबों, नदियों व नालों में पीने का पानी नहीं बचा है। पानी की तलाश में जंगली व छुट्टा जानवर गांवों की तरफ रुख किए हैं। जल स्तर नीचे जाने से भीटी दक्षिणी क्षेत्र में लगे सैकड़ों देशी हैंडपंप ने जल उगलना बंद कर दिया है। कमोवेश करीब 3200 इंडिया मार्का हैंडपंप भी दगा देना शुरू कर दिए हैं। बीडीओ डॉ. राजमंगल चौधर ने बताया कि विकास खंड के सभी 92 ग्राम प्रधानों को तालाबों में पानी भराने का निर्देश दिया जाएगा।

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-फसलें भी होती हैं प्रभावित-भीटी : इन नदियों, तालाबों के किनारे छोटे किसानों की सैकड़ों एकड़ खेत स्थित हैं। इसी के सहारे इनकी फसलों की ¨सचाई भी रहती है। इनके सूखने से सैकड़ों एकड़ गेहूं, चना, सब्जियों, हरे चारे की फसलें बर्बाद हो रही हैं। ऐसे में किसानों के समक्ष दोहरा संकट उतपन्न हो गया है।

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गत वर्ष बारिश औसत से कम हुई थी। जिससे नदियों, नालों, तालाबों म ं पानी सूख गया है। जलस्तर घटने का मुख्य कारण बरसात कम होना है। अप्रैल माह में विधायक व एमएलसी निधि से इंडिया मार्का हैंडपाइप गांवों में लगाए जाने हैं। इसी दौरान सर्वे कर जलस्तर की गहराई की नाप की जाएगी।

अनिल चंद्र

अधिशासी अभियंता

जल निगम

Posted By: Jagran