अरविंद सिंह, अंबेडकर नगर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर मानिकपुर गांव में भी दूसरे गांवों की तरह तमाम समस्याएं थीं, लेकिन अब अंत्योदय के खातिर यहां ‘ग्राम उदय’ हो रहा है। अब इस गांव में देसी-विदेशी पुस्तकों से समृद्ध लाइब्रेरी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि सहित युवाओं की मदद के लिए अलग-अलग समितियां भी हैं। यह किसी सरकारी सहयोग से नहीं हुआ, बल्कि यह सब कुछ यहां के लोगों ने ही किया है। यहां के लोग दुनिया के बाजार में उलझे, मगर अपने गांव को नहीं भूले। इंग्लैंड में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर गिरिजेश सिंह की पुणे में इंडस्ट्री जमा चुके दोस्त पंकज और लखनऊ में तैनात अग्निशमन अधिकारी विजय सिंह से बात होती तो गांव की चर्चा जरूर चलती।

हालचाल गांव के हालात पर आकर ठहरता तो इसे बदलने की कसक इनके मन में उठती। इसी के चलते एक दिन गिरिजेश ने दोनों मित्रों से ‘ग्राम उदय’ पर चर्चा की। 2015 में तीनों दोस्त गांव में वरिष्ठों और युवाओं के साथ इस पर बात करने बैठे। सबने इनकी सोच का साथ दिया और दिसंबर 2016 में शिक्षा, स्वास्थ्य, युवा कल्याण और खेती के उत्थान के लिए समितियां गठित हो गईं। इनका जिम्मा गांव में मौजूद लोग संभालते हैं। गांव से दूर रहने वाले संसाधन जुटाने के साथ कीमती सुझाव देते हैं।

प्रोफेसर, प्राचार्य, इंजीनियर, डॉक्टर, शिक्षक, सैनिक जैसे पदों पर तैनात गांव के विभिन्न लोग इस तरह से वहां के अंतिम व्यक्ति के विकास में योगदान कर रहे हैं। गिरिजेश के पिता अवध बिहारी और चाचा नवल बिहारी उनकी मंशा से प्रभावित हुए और घर दान दे दिया। यहां लाइब्रेरी खुली तो देशविदेश में रह रहे गांव के युवाओं ने किताबें भेजकर इसे समृद्ध कर दिया। इस अध्ययन केंद्र का संचालन शिक्षा समिति करती है। इसमें गांव के रिटायर शिक्षक मुफ्त पढ़ाते हैं। बच्चों का सामूहिक जन्मदिन मनाया जाता है।

प्रतिवर्ष ग्राम उदय वार्षिकोत्सव में मेधावियों का सम्मान होता है। गांव के प्राथमिक विद्यालय को आपसी सहयोग से सजाया गया है। सुबह योग समिति यहां योग कराती है। इसमें बच्चे, महिलाएं युवा और बुजुर्ग तक प्राणायाम करते हैं। खेल समिति प्रतिभाओं को निखार रही है। युवा समिति के सदस्य पूर्व मेजर प्रमोद कुमार गांव में युवाओं को सेना में भर्ती होने का प्रशिक्षण देते हैं। कृषि समिति कम लागत में खेती के तरीके बताने के साथ उत्पाद को उचित बाजार भी मुहैया कराने में मदद करती है।

कई देशों का भ्रमण किया, लोगों को काम करते देखा। लगा कि इससे अधिक मेहनती लोग हमारे गांव में हैं, लेकिन सही मार्गदर्शन की कमी के चलते पिछड़े हैं। एक टीस यह भी थी कि जहां पढ़े-लिखे हैं वहां के लिए कुछ नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में ‘ग्राम उदय’ का विचार आया। ग्रामीणों को उनके प्रयास से आगे बढ़ने का अवसर देना ही मकसद है।

-गिरिजेश सिंह (वाट्सएप पर बताया)

गरिजेश का विचार सुना तो गांव के लिए कुछ करने की इच्छा पूरी होती दिखी। भागमभाग से निकलकर गांव में पहुंचने के बाद जिंदगी भी खुशहाल लगने लगती है। बस यहां का पिछड़ापन मन को कचोटता रहा। हमारा प्रयास है कि गांव के प्रत्येक व्यक्ति को उसकी रुचि के अनुसार काम में दक्ष किया जाए, जिससे ग्राम उदय की मंशा सफल हो।

-विजय सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी

लखनऊ

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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