अंबेडकरनगर : मताधिकार के प्रयोग से कोई भी 18 साल से ऊपर का युवा वंचित नहीं रह जाए। इसके लेकर भारत निर्वाचन आयोग पूरी कोशिश में जुटा है। लिहाजा आयोग ने पुनरीक्षण अभियान में मतदाताओं को जोड़ने के लिए एक माह का और वक्त दिया है। ऐसे में घर-घर अभियान को और प्रभावी किए जाने के साथ ही बूथ दिवस को सफल बनाए जाने की चुनौती सौंपी है। इसे लेकर जिला निर्वाचन कार्यालय मतदाता बनाए जाने की रणनीति तय करने में जुटा है। खास तौर पर युवाओं, महिलाओं तथा दिव्यांगों को मतदाता बनाए जाने के लिए बीएलओ को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।लोकसभा चुनाव का अघोषित बिगुल बज चुका है और राजनीतिक दलों से लेकर निर्वाचन आयोग भी तैयारियों में जुटा है। बंग्लौर से नई ईवीएम मशीनों में बैलट तथा कंट्रोल यूनिट मंगाए जाने के बाद अब 2503 वीवीपैट लाने के लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी आरके चौरसिया को रवाना किया गया है। ऐसे में चुनाव आयोग की पहली नजर मतदाताओं पर टिकी है। प्रयास किया जा रहा है कि पहली जनवरी 2019 को 18 वर्ष की आयु पूरा करने वाले प्रत्येक युवा को मतदाता बनाए जाने के साथ ही मतदान का अधिकार दिलाया जाना है। लिहाजा 30 नवंबर तक नए मतदाता बनाए जाने की कवायद जारी रहेगी। इसके साथ ही बोगस मतदान को रोकना भी चुनौती से कम नहीं है। खास तौर पर पंजीकृत मतदाताओं के सापेक्ष मतदान के प्रतिशत को प्रभावित करने वाले बोगस मतदाताओं को मतदाता नामावली से बाहर किए जाने पर भी जोर दिया जा रहा है। दोहरे नाम वाले मतदाताओं को विलोपित करने के लिए खास साफ्टवेयर भी तैयार किया गया है। हालांकि इसके बावजूद घर-घर अभियान को प्रभावी बनाए जाने पर अधिक जोर दिया जा रहा है। जबकि बीएलओ की उदासीनता इसमें अड़चन बन रही है। अभी तक चलाए गए अभियान में करीब 25 हजार ही नए मतदाता बनाए गए हैं। वहीं बोगस मतदाता के विलोपन में कमी रही है। वहीं महिला, दिव्यांग और युवा मतदाता बनाए जाने में भी खास सफलता नहीं मिल सकी है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी गिरिजेश कुमार त्यागी ने बताया कि घर-घर पुनरीक्षण अभियान की निगरानी शुरू कराई गई है। बूथ दिवस में लापरवाही करने वालों को भी चिन्हित किया जा रहा है। इसमें दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।