अंबेडकरनगर: साइबर अपराध का शिकार होने से लोगों को बचाने के लिए पुलिस महकमे ने बड़ी पहल शुरू की है। अपराधियों पर नकेल लगाने के लिए विभाग द्वारा हाइटेक संसाधन उपलब्ध कराने के साथ पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देने की योजना है। थानों में इस बावत बुधवार से कार्यशाला का आयोजन होना था, लेकिन किसी कारण से नहीं हो सका। थानाध्यक्ष समेत उपनिरीक्षकों व आरक्षियों, थाने के कंप्यूटर आपरेटर को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

साइबर ठगी के शिकार लोगों को उनका पैसा वापस कराने के लिए महकमे ने 112 के अलावा हेल्पलाइन नंबर 155260 जारी किया है। एसपी के नेतृत्व में पुलिस लाइन में हुई कार्यशाला में थानाध्यक्षों को योजना की विस्तृत जानकारी दी गई। एक-दो दिनों में सभी थानों पर भी इसे कराया जाएगा।

एसपी भी रहेंगे प्रशिक्षण में शामिल: डीजीपी मुख्यालय से विशेषज्ञ आनलाइन प्रशिक्षण देंगे, इसमें एसपी के भी शामिल होने का निर्देश है। एक राजपत्रित अधिकारी को भी बतौर नोडल अधिकारी के रूप में प्रशिक्षण के हर सत्र में हिस्सा लेने को कहा गया है। एडीजी क्राइम रामकुमार की तरफ से 15 से 30 सितंबर के मध्य जूम एप के जरिए साइबर प्रशिक्षण का निर्देश है।

अपराध के बदलते तरीकों के बारे में दी जाएगी जानकारी: थानों में नियुक्त कंप्यूटर आपरेटर, महिला हेल्पडेस्क पर तैनात महिला आरक्षी, थाने के चार उपनिरीक्षक व चार आरक्षी के साथ साइबर थाने के सभी पुलिसकर्मियों को इसमें हिस्सा लेने को कहा गया है। विशेषज्ञ साइबर अपराध के बदलते तरीकों व फ्राड के मामलों की जानकारी देंगे। अपराध की रोकथाम की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों से लेकर साइबर अपराध की विवेचना की बारीकियों, इंटरनेट मीडिया तथा आइटी एक्ट के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

थानों में स्थापित है साइबर क्राइम डेस्क: गत दिनों थानों में साइबर क्राइम डेस्क की स्थापना की गई थी। यहां तैनात पुलिसकर्मियों को पीड़ित व्यक्तियों की सहायता व मार्गदर्शन करने के साथ साइबर फ्राड के मामलों में ठगी गई रकम को बैंक में फ्रीज कराने की प्रक्रिया की जानकारी देने के निर्देश दिए गए थे। एसपी आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिलाकर उन्हें अपराध के बदलते स्वरूप से निपटने में दक्ष बनाया जाएगा।

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