अंबेडकरनगर : शासन की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में जनपद के बुनकरों के वस्त्र उद्योग को शामिल किया गया है। बुनकरों की समस्याओं को पूछने के लिए शनिवार को लगने वाली साप्ताहिक कपड़ा बाजार में पहली बार जिलाधिकारी सुरेश कुमार पहुंचे। उन्होंने कहा कि बुनकर समस्याओं का निराकरण शासन से कराएंगे। जनपद के टांडा, भुलेपुर, जलालपुर, इल्तिफातगंज, जहांगीरगंज, नरियांव, खासपुर के घर-घर में कुटीर उद्योग की तरह वस्त्रों की बुनाई का कार्य फैला है। तकरीबन 50 हजार से अधिक पॉवरलूमों पर लाखों मीटर कपड़े प्रतिदिन बुने जा रहे हैं। लाखों लोगों को वस्त्र बुनाई से रोजगार सुलभ हो रहा है। बुनकरों के असंगठित वस्त्र उद्योग को ऊंचाई तक लेकर जाने के लिए शासन ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के अंतर्गत बुनकरों के वस्त्र उद्योग को शामिल किया है। शासन ने पावरलूमों के आधुनिकीकरण कर अनुदान देने आदि की कई योजनाएं लागू हैं। जानकारी के अभाव में बुनकर लाभ नहीं उठा पा रहे है। डीएम हक्कानी हाट पहुंचे और वस्त्रों की दुकानों पर जाकर लुंगी, गमछा, चादर, शॉर्टिंग, स्कार्फ आदि वस्त्रों को देखा, परखा और भाव को जाना। डीएम को कासिम अंसारी, अदील अहमद, मोहम्मद शबली, अंसार अहमद आदि ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद छोटे बुनकरों द्वारा उत्पादित कपड़ों की खरीद पहले जैसी नहीं होती है। बाजार में दूसरे प्रांतों से आने वाले व्यापारी जीएसटी में पंजीकरण नहीं होने के कारण छोटे बुनकरों से माल की खरीद नहीं करते है। स्थानीय व्यापारी ही कपड़ों की खरीद कर रहे हैं। प्रदेश की सरकारी धागा मिलों के बंद होने के कारण लगभग 30 रुपये प्रति किलोग्राम धागा महंगा मिल रहा है। उल्टे दिन प्रतिदिन धागों के उतार-चढ़ाव से भी बुनकरों की क्षति होती है। सरकार के स्कूलों में भी बुनकरों से ड्रेस खरीद कर दिए जाएं तो प्रदेश के बुनकरों के दिन अच्छे होंगे। डीएम ने बुनकरों को आश्वस्त किया कि शासन में समस्यायों को पहुंचाकर निराकरण कराया जाएगा। एसडीएम कोमल यादव उनके साथ रहे।

Posted By: Jagran

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