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अंबेडकरनगर के 100 गांवों को 3 दशक बाद भी रेलवे क्रॉसिंग का इंतजार, दूसरी लाइन बिछने पर बंद हुआ रास्ता

Published: Mon, 26 Oct 2026 05:21 PM (IST)

अंबेडकरनगर में लखनऊ-वाराणसी रेलखंड के दोहरीकरण के बाद निनामपुर सहित 100 से अधिक गांवों का रास्ता बंद हो गया है, जिससे ग्रामीणों को लंबा सफर तय करना पड़ रहा है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. लखनऊ-वाराणसी रेलखंड दोहरीकरण से 100 गांवों का रास्ता बंद।

  2. ग्रामीणों को तीन दशकों से रेलवे क्रॉसिंग का इंतजार।

  3. सांसद ने रेल मंत्री से मिलकर समाधान का आश्वासन पाया।

जागरण संवाददाता, अंबेडकरनगर। लखनऊ-वाराणसी रेलखंड को डबल करने के बाद रास्ता बंद होने से ग्रामीणों को अब कम दूरी के बजाय लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। निनामपुर, अरियौना, कुर्मीडीहा और रामदासपट्टी में रेलवे क्रासिंग की मांग तीन दशक से उठ रही है। यह समस्या सौ से अधिक गांवों के नागरिकों से जुड़ी है। समपार की मांग करीब सात दशक बाद भी पूरी नहीं हुई।

इस अवधि में भाजपा, कांग्रेस समेत अन्य दलों की सरकारें केंद्र में आईं। केंद्र और प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ तथा कटेहरी विधानसभा क्षेत्र के प्रतिनिधि भी बदले, लेकिन ग्रामीणों की मांग पूरी नहीं हुई। यह मुद्दा लोकसभा और विधानसभा में कई बार उठ चुका है।

कटेहरी विधानसभा के उत्तरी इलाके के सैकड़ों गांवों को ब्लॉक मुख्यालय, रेलवे स्टेशन, जिला, मंडल और राजधानी मुख्यालय से जोड़ने के लिहाज से यह रास्ता अहम है। दूसरी लाइन बिछने के बाद रेलवे विभाग ने करीब सात वर्ष पहले यहां से आवागमन रोक दिया। कटेहरी स्टेशन अधीक्षक वीरेंद्र सागर ने बताया कि नागरिकों का मांग पत्र उच्चाधिकारियों को भेजा गया है।

C-449-1-LKO1125-449540

कटेहरी बाजार के बजरंगबली चौबे के नेतृत्व में 1997 में इस समस्या को लेकर आंदोलन शुरू हुआ था। तत्कालीन डीआरएम पीटी टंडन, सांसद, विधायक, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। स्थलीय निरीक्षण के लिए पहुंचे तत्कालीन डीआरएम एहतराम अली का घेराव कर नारेबाजी की गई। इसके बाद विभाग ने बजरंगबली चौबे समेत दर्जन भर लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।

रेलमंत्री से मुलाकात कर समस्या से अवगत कराया गया है। मंत्री ने निस्तारण का आश्वासन दिया है। समाधान के लिए प्रयास जारी हैं। -लालजी वर्मा, सांसद।