प्रयागराज, [ मनीष मिश्रा ]। इंसान के दुनिया से चले जाने के बाद भी इंसानियत जिंदा रहती है। नाम और निशां छोड़ जाती है। यह पंक्तियां उन लोगों के लिए मौजू है जो अंगदान कर खुद को दूसरों के जेहन में जिंदा रखते हैैं हमेशा। संगमनगरी में ऐसे अंगदानियों की कमी नहीं है। विश्व अंगदान दिवस पर 13 जुलाई को ऐसे ही अंगदानी याद किए जाएंगे।

प्रयागराज में बीते 10 माह में 90 से ज्यादा लोगों ने नेत्रदान किया

टैगोर टाउन निवासी 75 वर्षीया मीरा चटर्जी का इसी साल चार अप्रैल को निधन हो गया था। उनकी इच्छा थी कि उनकी आंखे किसी को रोशनी दें, इसलिए परिवार के लोगों ने मनोहर दास नेत्र संस्थान (एमडीआइ) के आई बैंक को सूचना दी। आई बैैंक की टीम ने मीरा के घर जाकर उनकी आंखें सुरक्षित निकाली और दो जरूरतमंदों में कार्निया प्रत्यारोपण कराया। दो अगस्त को गोलोकवासी हुईं अलोपीबाग निवासी सरोज कुमारी श्रीवास्तव की आंखें भी उनकी इच्छानुरूप आई बैंक को दान कर दी गई। इससे दो जरूरतमंदों में कार्निया प्रत्यारोपण हुआ और उन्हें अंधेरे से उजाले में लाया गया। प्रयागराज में बीते 10 माह में 90 से ज्यादा लोगों ने नेत्रदान किया है। यह तस्वीर सुखद है। बेहतर कल की उम्मीद भी जगाती है।

कोरोना के चलते नेत्रदान में आई कमी

मनोहर दास नेत्र संस्थान के निदेशक डॉ. एसपी सिंह बताते हैं कि कोरोना के चलते नेत्रदान में कमी आई है, लेकिन देहदानियों की संख्या हाल के वर्षों में बढ़ी है। वैसे अभी भी आई बैैंक में चार सौ ऐसे दृष्टिबाधित लोगों का नाम दर्ज हैैं, जिन्हें रोशनी चाहिए। उम्मीद है कि कोरोना काल खत्म होने के बाद उनकी जिंदगी में उजाला वापस आएगा। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एनाटमी डिपार्टमेंट में भी ऐसे दर्जनों देहदानियों के नाम दर्ज हैैं जो देहदान करने का संकल्प पत्र भर चुके हैं।

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