प्रयागराज,जेएनएन। किसी भी तरह की मदद के जरिए कैंसर पीडि़तों के चेहरे पर मुस्कान लाने का सुख कोई लाउदर रोड निवासी अरुण बग्गा से पूछें। होटल व्यवसायी अरुण बग्गा प्रयागराज में सक्रिय कैंसर केयर फाउंडेशन के सचिव हैं। उन्हें और उनकी संस्था से जुड़े किसी पदाधिकारी को कैंसर नहीं है फिर भी इस जानलेवा रोग से पीडि़त लोगों का असहनीय दर्द सभी महसूस करते हैं। बीते 25 वर्षों में एंबुलेंस, स्ट्रेचर, व्हील चेयर देने के अलावा अरुण बग्गा अब तक बतौर सचिव 1000 से अधिक पीडि़तों की विभिन्न तरीकों से मदद कर चुके हैं।

अरुण की संस्था क्षेत्रीय कैंसर संस्थान कमला नेहरू मेमोरियल ट्रस्ट से जुड़कर सहयोग करती है। फाफामऊ, झूंसी, करछना में संस्था के केंद्र है। वह ब्लड बैंक से कैंसर पीडि़तों के लिए 50 फीसद सब्सिडी पर ब्लड दिलवाते हैं।  लॉक डाउन के दौरान  ब्लड बैंक को एक वाहन उपलब्ध कराया। इसका इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले शिविरों के जरिए ब्लड एकत्र करने में होता है। कमला नेहरू मेमोरियल ट्रस्ट के क्षेत्रीय कैंसर संस्थान को छह स्ट्रेचर व आइसीयू के लिए मशीनें भी दिलाईं। वह कहते हैैं कि लोगों को कैंसर छिपाना नहीं चाहिए। वह कहते हैैं कि उनसे और उनकी संस्था से जितना बन पड़ेगा, मदद करते रहेंगे।

ब्रेस्ट कैंसर को हराया, अब देती हैं न घबराने की सलाह

 कैंसर पीडि़त को मानसिक उलझन का शिकार भी बनाती है लेकिन जैसे हर चीज में अपवाद है तो कैंसर पीडि़तों में भी। ऐसी ही एक अपवाद हैैं कालिंदीपुरम की रश्मि मल्होत्रा।  ब्रेस्ट कैंसर होने पर उन्होंने चंडीगढ़ में अपना इलाज कराया और अब स्वस्थ हैं। अब वह कैंसर पीडि़तों की मानसिक उलझन दूर करने के लिए उनकी काउंसिलिंग करती हैं। 42 साल की रश्मि को 2019 में ब्रेस्ट कैंसर हुआ था। समय रहते जानकारी हो गई इसलिए इलाज में उन्होंने देर नहीं की। रक्षा विभाग में कार्यरत पति विक्रम के साथ चंडीगढ़ में चेकअप कराया तो कैंसर की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। पति विक्रम मल्होत्रा और ससुराल के सभी लोगों का पूरा सहयोग मिला। कुल आठ कीमोथेरेपी हुई। कहती हैैं कि मानसिक रूप से सदृढ़ रहने के लिए मैैंने यू-ट्यूब का भी सहारा लिया।

करती हैं कैंसर मरीजों की काउंसिलिंग

रश्मि प्रयागराज स्थित मायके में रहती हों अथवा फिर ससुराल चंडीगढ़ में, हर महीने दो चार दिन कैंसर मरीजों के पास जरूर जाती हैं काउंसिलिंग के लिए। अपना अनुभव साझा करते हुए सलाह देती हैं कि इलाज से न घबराएं। डाक्टरों का सहयोग करें और उनसे बराबर संपर्क में रहें।

Edited By: Rajneesh Mishra