प्रयागराज : राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत जिले में संचालित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हुनर को कुंभ मेला प्रशासन भी भुनाने की तैयारी में है। मेले में भंडारे के लिए लगने वाले दोने-पत्तल, गिलास आदि बनाने की जिम्मेदारी समूह की महिलाओं को दी जाएगी। महिलाएं कितनी सामग्री तैयार कर सकेंगी, इसका ऑकलन विभाग कर रहा है। कुंभ मेले में भंडारे के लिए साधु-संतों एवं अन्य संस्थाओं के पदाधिकारियों को दोने-पत्तल, गिलास आदि खरीदने के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए मेला प्रशासन उन्हें मेला क्षेत्र में ही यह सामग्री उपलब्ध कराएगा। मेजा, कोरांव, शंकरगढ़ क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बड़े पैमाने पर दोने-पत्तल बनाने का काम करती हैं। थोक में इन सामग्री की उपलब्धता समूह की महिलाओं के जरिए हो जाए, इसलिए मेला प्रशासन इस काम में उनकी मदद लेने का निर्णय लिया है। इससे महिलाओं को करीब डेढ़-दो महीने काम भी मिल जाएगा और उन्हें अच्छी आमदनी भी हो सकेगी। जिले में समूह की महिलाएं कितना दोना-पत्तल, गिलास बना सकेंगी, इसका आंकलन एनआरएलएम विभाग की ओर से ब्लॉक स्तर पर कराया जा रहा है। विभाग ऑकलन करके एक सप्ताह में ब्यौरा मेला प्रशासन को सौंपेगा। विभाग की यह भी कोशिश है कि दूसरे जिलों के समूहों की भी इस कार्य में मदद ली जाए, ताकि पर्याप्त सामग्री मेला प्रशासन को उपलब्ध कराई जा सके। समूह के लिए लगाए जाएंगे 35 स्टॉल :

मेले में समूह के लिए 35 स्टॉल लगाए जाएंगे। इसमें 10 स्टॉलों पर जिले के समूहों की ओर से तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जबकि 25 स्टॉलों पर हर जिले के एक-एक समूहों के उत्पाद 10-10 दिन के लिए लगाए जाएंगे। हर सेक्टर में वेंडिंग जोन में दोना-पत्तल बेचने वालों को जगह दी जाएगी। समूह की महिलाओं से भी इसमें मदद ली जाएगी। कुल्हड़ बनाने के लिए कुम्हारों की भी मदद ली जाएगी। इसके लिए 16 नवंबर को कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

- विजय किरन आनंद, कुंभ मेलाधिकारी कोरांव, शंकरगढ़ और बहरिया में चार ग्राम संगठनों के पास कागज के दोने-पत्तल बनाने की मशीनें भी हैं। एक मशीन से 40-50 हजार दोने-पत्तल एक दिन में बनते हैं।

- शरद कुमार, जिला प्रबंधक एनआरएलएम।

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