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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 09, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Chhath Puja 2021: महिलाओं ने रखा 36 घंटे का निर्जला व्रत, आज डूबते सूर्य को देंगी अर्घ्य

By Ankur TripathiEdited By:
Published: Tue, 09 Nov 2021 07:40 PM (IST)Updated: Wed, 10 Nov 2021 09:30 AM (IST)

छठी मइया का पूजन कर लौकी की खीर पकाकर उसे परिवार के सदस्यों के साथ ग्रहण किया। यहीं से 36 ...और पढ़ें

गंगा घाट और संगम के पास घाट पर वेदी बनाकर स्थान किया सुरक्षित
गंगा घाट और संगम के पास घाट पर वेदी बनाकर स्थान किया सुरक्षित

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। कार्तिक शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि पर सुख-समृद्धि के लिए महिलाओं ने डाला छठ व्रत के तहत खरना मनाया। त्याग की पराकाष्ठा के व्रत को लेकर उत्साह व भक्तिभाव से ओतप्रोत महिलाओं ने मंगलवार की सुबह गंगा, यमुना व संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाई। दिनभर व्रत की तैयारी व भजन-कीर्तन में लीन रहीं। शाम को पुन: स्नान करने के लिए घाट पर पहुंचीं। इससे संगम तट, यमुना का गऊघाट, बलुआघाट, ककरहा घाट, गंगा का रामघाट, दारागंज व फाफामऊ घाट भक्तों से गुलजार हो गया।

आज डूबते सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य

व्रती महिलाओं ने स्नान करने से पहले घाट पर वेदी बनाकर बुधवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए स्थान सुरक्षित किया। कुछ लोगों ने घाट पर स्थान घेरकर अपना नाम लिखा, कुछ ने विजिटिंग कार्ड रख दिया। स्नान के बाद घर आकर छठी मइया का पूजन करके गन्ने के रस में चावल और लौकी की खीर पकाकर उसे परिवार के सदस्यों के साथ ग्रहण किया। यहीं से 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ हो गया। व्रती महिलाएं बुधवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी। फिर गुरुवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद जल ग्रहण करेंगी। सुख-समृद्धि के लिए व्रती महिलाएं घाट पर कोसी भरेंगी।

प्रसाद के लिए ठेकुआ बनाया

डाला छठ पूजा का सबसे खास प्रसाद ठेकुआ है। व्रती महिलाओं ने गेहूं के आटे में देशी घी और चीनी मिलाकर ठेकुआ बनाया। बुधवार को उसे छठी मइया को अर्पित करेंगी। अगले दिन उसे ग्रहण करके व्रत का पारण करेंगी।

गायत्री का हुआ प्राकट्य : डा. बिपिन

विश्व पुरोहित परिषद के अध्यक्ष डा. बिपिन पांडेय बताते हैं कि कार्तिक शुक्लपक्ष की षष्ठी तिथि के सूर्यास्त और सप्तमी के सूर्योदय के मध्य वेदमाता गायत्री का प्राकट्य हुआ था। प्रकृति के षष्ठ अंश से उत्पन्न षष्ठी माता बालकों की रक्षा करने वाले भगवान विष्णु द्वारा रची माया हैं। बच्चे के जन्म के छठें दिन छठी मैया की पूजा की जाती है, जिससे बच्चे के ग्रह-गोचर शांत होते हैं। डाला छठ पर डूबते व उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठी मइया (षष्ठी देवी) का पूजन करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

घर पर करेंगी पूजन

कोरोना संक्रमण के कारण काफी महिलाएं घर पर कोसी भरकर पूजन करेंगी। घर में बड़े डब, टंकी में प्रवेश करके सूर्यदेव को अर्घ्य देंगी। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है।

आज शाम 5.31 बजे होगा सूर्यास्त

ज्योतिर्विद आचार्य अविनाश राय बताते हैं कि कार्तिक शुक्लपक्ष की षष्ठी तिथि मंगलवार की शाम 4.06 बजे लग चुकी है। जो बुधवार की दोपहर 2.02 बजे तक रहेगी। उत्तराषाड़ा नक्षत्र, शूल-गंड नामक योग रहेगा। मकर राशि में चंद्रमा, बृहस्पति व शनि का संचरण होगा, जबकि तुला राशि में सूर्य, बुध व मंगल ग्रह संचरण करेंगे। यह उत्तम संयोग है। सूर्यास्त 5.31 बजे होगा, जबकि गुरुवार की सुबह 6.34 बजे सूर्योदय होगा। बताते हैं कि सूर्यदेव को अघ्र्य देते समय ''ओम घृणि सूर्य देवाय नम:, ओम दिवाकराय नम:Ó व गायत्री मंत्र का जप करते रहें।