गुरुदीप त्रिपाठी , कुंभनगर : क्रिकेट के खेल में जिस 'बाउंसर' का इस्तेमाल विपक्षी टीम के खिलाड़ी को धराशायी करने के लिए किया जाता है। हालांकि तीर्थराज प्रयागराज में चल रहे दिव्य कुंभ महाकुंभ में वही 'बाउंसर' साधु-संतों को बचाने का काम कर रहे हैं। तंबुओं की नगरी में बसे सेक्टर-12 स्थित किन्नर अखाड़ा एक मात्र ऐसा अखाड़ा है जिसने अपनी सुरक्षा के लिए बाउंसरों की दीवार तैनात कर रखी है। ये बाउंसर न केवल किन्नर संतों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि इनके दर्शनार्थ आ रही भीड़ के प्रबंधन को भी बखूबी अंजाम दे रहे हैं।

कुंभ मेला में ऐसा पहली बार

अब तक आपने सेलिबेटी की सुरक्षा के लिए बाउंसरों की तैनाती के इंतजाम देखे होंगे, लेकिन प्रयागराज में चले रहे भव्य कुंभ दिव्य कुंभ में पहली बार संतों की सुरक्षा के लिए इन बाउंसरों की मदद ली जा रही है। यह प्राइवेट सुरक्षाकर्मी न केवल संतों की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे हैं, बल्कि अखाड़ों तक आने वाली भीड़ का प्रबंधन भी कर रहे हैं। हालांकि, संतों की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे इन बाउंसरों को संतों की ओर से साफ-साफ निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी श्रद्धालु से अभद्रता या अशोभनीय हरकत न की जाए।

बाउंसरों की इसलिए पड़ी जरूरत

कुंभ नगरी में पहली बार धर्म और आस्था के संगम का साक्षी बने किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के शिविर में बाउंसरों की बौछार है। पहली दफे किन्नर अखाड़े की ओर से देवत्व यात्रा निकाली गई। ऐसे में इस बार मेले में सबसे ज्यादा क्रेज किन्नर अखाड़े का ही दिखा।

बाउंसर रवींद्र सिंह राणा के नेतृत्व में कर रहे अखाड़े की सुरक्षा

इंदौर से आई बाउंसरों की फौज कंपनी के एमडी रवींद्र सिंह राणा के नेतृत्व में अखाड़े की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही है। रवींद्र सिंह बताते हैं कि हर रोज हजारों की तादाद में लोगों की भीड़ लगी रहती है। सभी माई का दर्शन करने की चाह में अंदर जाने के लिए लगे रहते हैं। ऐसे में इन लोगों को संभालने का जिम्मा इनकी टीम पर रहता है। किन्नर अखाड़े के अलावा बर्फानी बाबा के शिविर में भी बाउंसर आए थे। हालांकि, वह कुछ ही दिनों तक थे फिर चले गए।

आध्यात्म के साथ ग्लैमर भी

भले ही अध्यात्म के साथ किन्नर अखाड़े जुड़ चुके हों, लेकिन यह अभी भी अपनी साज-सज्जा से विरत नहीं हुए हैं। इससे तंबुओं की नगरी में अध्यात्म के साथ ग्लैमर का तड़का भी देखने को मिल रहा है। इसी ललक को देखने के लिए लोगों की भीड़ यहां पहुंच रही है। सबसे खास बात यह है कि यहां कोई वीआइपी ट्रीटमेंट नहीं है, इसलिए लोगों की पहली पसंद किन्नर अखाड़े में पहुंचने की है। लोग आसानी से अखाड़े की महामंडलेश्वर आचार्य लक्ष्मीनाराण त्रिपाठी का आशीष ले रहे हैं।

सिंहस्थ कुंभ से बाउंसरों ने संभाली कमान

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर रवींद्र सिंह राणा ने दैनिक जागरण से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने किन्नर अखाड़े के सुरक्षा की कमान उज्जैन सिंहस्थ कुंभ से संभाली। बकौल राणा, अजयदास जी ने 13 अक्टूबर 2015 को अखाड़े की स्थापना की थी। तीन अप्रैल 2016 को हमारी मुलाकात अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजयदास जी और दुर्गादास जी से हुई थी। उन्होंने सुरक्षा की कमान टीम को सौंपी। इसके बाद से माई का आशीर्वाद लगातार हमारी टीम को मिल रहा है। यही वजह है कि तीर्थनगरी प्रयागराज भी हमारी टीम माई के साथ पहुंची और उनकी सुरक्षा में लगी है। अखाड़े की तरफ से सुरक्षा के एवज में मिलने वाली रकम के बारे में उन्होंने बताया कि जो माई की इच्छा रहती है, उसी कि अनुरूप काम किया जाता है।

मानते क्यों नहीं...थक जाती हैं माई

मेला क्षेत्र में पहुंचने के बाद हर कोई किन्नर अखाड़ा भी जाना चाहता है। दरअसल इस बार अन्य संतों की अपेक्षा किन्नर अखाड़े का ज्यादा ही क्रेज है। ऐसे में आचार्य लक्ष्मी नारायण ने भक्तों से मिलने का एक समय निर्धारित किया है। इसके बावजूद जबरन लोग जाने की जिद पर अड़ जाते हैं। भीड़ को समझाते हुए टीम में लगे शिवम सिंह तपाक से बोल पड़ते हैं। आप लोग मानते क्यों नहीं...थक जाती हैं माई...। कितनी देर वह बैठें...।

Posted By: Brijesh Srivastava

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