प्रयागराज , जेएनएन। अप्रैल का महीना मेरे लिए बेहद कष्टकारी था। मैं कोरोना से संक्रमित हो गया। जीवन पर संकट मंडरा रहा था। तन व मन साथ देने को तैयार नहीं थे लेकिन, मैंने हिम्मत नहीं हारी। सकारात्मक सोच बनाए रखी। ईश्वर पर अटूट विश्वास था। विपदा में विश्वास की डोर और मजबूत हो गई। इससे आत्मबल काफी बढ़ा। इसी से मैंने कोरोना को मात दे दिया। यह कहना है सिविल लाइंस निवासी समाजसेवी निशीथ वर्मा का।

निशीथ वर्मा बताते हैं कि कोरोना वायरस से पीडि़त रहते हुए मैं मन ही मन ईश्वर का ध्यान करता था।  मुझे आभास था कि विपदा में ईश्वर मेरी परीक्षा ले रहे हैं, जिसमें मुझे पास होना है। यह भाव आने पर सोच सकारात्मक हो गई और मेरे स्वास्थ में सुधार होने लगा। घर पर ही रहकर भजन सुनते, योग व ध्यान भी लगाते रहे। कुछ दिन में ही ठीक हो गए। कमजोरी दूर करने के लिए शाकाहारी भोजन, फल और काढ़ा ले रहे हैं। निशीथ का कहना है कि कोरोना से बचाव जरूरी है लेकिन अगर दुर्भाग्य से कोरोना की चपेट में आ गए तो घबराना नहीं चाहिए बल्कि साहस और संयम के साथ दवाओं और घरेलू नुस्खों को अपनाकर इस  वायरस को मात देना चाहिए।