प्रयागराज, जेएनएन।  UPPSC RO/ARO Exam 2017 : उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग (UPPSC) की आरओ-एआरओ 2017 परीक्षा में सुलतानपुर के अमित कुमार सरोज टॉपर रहे हैं, जबकि दूसरे नंबर पर आंबेडकर नगर के सुरेंद्र व देवरिया के प्रवीण कुमार मणि तीसरे नंबर पर रहे। प्रथम तीन स्थान पर रहने वाले चयनित कई साल से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। आरओ-एआरओ में सफलता मिलने से वह उत्साहित हैं, लेकिन इससे संतुष्ट नहीं हैं। वह अभी तैयारी करते रहेंगे।

सुलतानपुर जिले के चांदा ब्लाक के राजपुर गांव निवासी अमित कुमार सरोज दिल्ली में रहकर तैयारी करते हैं। इनके पिता अशोक कुमार सरोज राजस्व विभाग में कार्यरत हैं। नवोदय विद्यालय बाराबंकी से 12वीं की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने नोएडा स्थित निजी संस्थान से बीटेक किया। फिर दिल्ली में रहकर 2014 से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गए। पीसीएस की परीक्षाओं में लगातार बैठते रहे। इसके अलावा असिस्टेंट कमांडेंट, सहायक वन संरक्षक की परीक्षा में शामिल हुए।

अमित कुमार सरोज बताते हैं कि ब्लड कैंसर से पीड़ित उनकी मां सुशीला का 2018 में निधन हो गया, लेकिन तैयारी में जुटे रहे। इस सफलता को वह मां के आशीर्वाद के रूप में लेते हैं। तीन माह पहले आकांक्षा से विवाह हुआ। वह कहते हैं कि पीसीएस अधिकारी बनना उनका सपना है। इसके लिए तैयारी जारी रखेंगे।

यह सफलता की शुरुआत : प्रवीण

आरओ-एआरओ परीक्षा में तीसरे नंबर पर रहे देवरिया जिला के बैतालपुर तहसील के विक्रमपुर बंसपार गांव निवासी प्रवीण कुमार मणि प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। देवरिया से 12वीं तक की पढ़ाई करने के बाद लखनऊ चले गए। वहां से स्नातक करने के बाद प्रयागराज आ गए। इनके पिता गिरिजेश कुमार मणि प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक हैं। पीसीएस 2019 में मेंस की परीक्षा देने वाले प्रवीण ने पीसीएस 2017 में इंटरव्यू भी दिया था। लेकिन, सफलता नहीं मिल पायी। वह कहते हैं कि इस सफलता से उन्हें आगे बढऩे की प्रेरणा मिली है। अब नई ऊर्जा व उत्साह से पीसीएस की तैयारी करेंगे। उन्हें विश्वास है कि सफलता जरूर मिलेगी।

महिलाओं को मिली कम सफलता

आरओ-एआरओ 2017 की परीक्षा में महिला अभ्यर्थियों की सफलता का प्रतिशत कम रहा। स्थिति यह रही है कि शुरुआत के 50 चयनितों में महिला अभ्यर्थियों की संख्या मात्र दो है। 22वें नंबर पर दीपशिखा पांडेय व 41वें स्थान पर इंदू को सफलता मिली है। इनके अलावा महिला चयनितों की संख्या काफी कम है।

Posted By: Umesh Tiwari

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