प्रयागराज, जेएनएन। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में पीएफ घोटाले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व एमडी एपी मिश्रा की जमानत याचिका भी खारिज कर दी है। हजारों करोड़ के पीएफ घोटाले में कोर्ट ने इससे पहले गुरुवार को दो निदेशकों की भी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। लॉकडाउन के बाद भी इस चर्चित मामले में कोर्ट में सुनवाई हो रही है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में कर्मचारियों के पीएफ घोटाले में पूर्व प्रबंध निदेशक एपी मिश्रा की जमानत याचिका को आज खारिज कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने दिया है। कोर्ट ने लॉकडाउन लागू करने से पहले मिश्रा की जमानत याचिका पर सुनवाई की थी। इसने मामले में जमानत पर रिहा करने से इन्कार करने का आदेश कोर्ट ने आज दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि एपी मिश्रा काफी प्रभावशाली व्यक्ति हैं और इस केस में जांच अभी जारी है।

कोर्ट ने बिजली कंपनी के कर्मचारियों की पीएफ की धनराशि को प्राइवेट कंपनी में निवेश करने पर सख्त रुख अपनाया है। पूर्व प्रबंध निदेशक एपी मिश्रा के साथ अन्य दो निदेशक लखनऊ के जिला कारागार में बंद हैं। ईओडब्ल्यू ने नवंबर 2019 के पहले सप्ताह में मिश्रा के साथ ही दो निदेशकों को भी गिरफ्तार किया था। इस काफी चर्चित घोटाले की रिपोर्ट लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में दर्ज है। 

इससे पहले बुधवार को हाई कोर्ट ने बिजली विभाग के पीएफ घोटाले में आरोपित यूपीपीसीएल के पूर्व वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी व विकास चावला की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिजली विभाग के 42 हजार कर्मचारियों के जनरल प्राविडेंट फंड (जीपीएफ) व कंट्रीब्यूटरी प्राविडेंट फंड (सीपीएफ) के 2267.9 करोड़ रुपये के घोटाले में आरोपित यूपीपीसीएल के पूर्व वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी व विकास चावला की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति डीके सिंह ने दिया। सुधांशु द्विवेदी यूपीपीसीएल में बतौर निदेशक वित्त जून 2016 से जून 2019 तक रहे। इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ आईपीसी की धाराओं के अंतर्गत हजारों करोड़ के इस घोटाले की प्राथमिकी दो नवंबर 2019 को दर्ज कराई गई थी। मुकदमा आइएम कौशल सचिव ट्रस्ट ऑफ यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने दर्ज कराया है। आरोप है कि सुधांशु ने 42 हजार बिजली कर्मचारियों के जीपीएफ व सीपीएफ के पैसों को राष्ट्रीय बैंक में जमा न करके बिना किसी अनुमोदन के कमीशन लेकर एक प्राइवेट संस्थान दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) में जमा कर दिया। जांच में भी यह बात सामने आई है। बताया गया कि आरोपितों ने क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट का अपराध किया है।

सरकार की तरफ से कहा गया कि बिना बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की मीटिंग के मनमाने तरीके से इन पैसों को एक प्राइवेट संस्थान में जमा किया गया। वहीं, दूसरे आरोपित विकास चावला की जमानत अर्जी भी कोर्ट ने यह कहकर खारिज कर दी कि उसके व्यक्तिगत खाते में 5.69 करोड़ रुपये जमा किया गया था, जिसका कोई हिसाब वह नहीं बता सका। यह सारा ट्रांजेक्शन बतौर कमीशन लिया जाना कहा गया है।

यह है पूरा मामला

बिजली कर्मियों के जीपीएफ व सीपीएफ के 4122.70 करोड़ों रुपये डीएचएफसीएल में असुरक्षित ढंग से निवेश किए गए हैं। मार्च 2017 से दिसंबर 2018 तक यूपी स्टेट सेक्टर पावर इंप्लाइज ट्रस्ट द्वारा जीपीएफ के 2631.20 करोड़ रुपये और यूपीपीसीएल सीपीएफ (कंट्रीब्यूटरी प्रॉविडेंट फंड) के 1491.50 करोड़ रुपये डीएचएफसीएल में फिक्स्ड डिपॉजिट करा दिए गए थे। इसमें से कुल 1854.80 करोड़ रुपये ही वापस मिल सके हैं। मुंबई हाई कोर्ट द्वारा डीएचएफसीएल के भुगतान पर रोक लगाने के बाद बिजलीकर्मियों के भी 2267.90 करोड़ रुपये फंस गए थे। जांच में दोषी पाए गए पावर कारपोरेशन के तत्कालीन एमडी एपी मिश्र, निदेशक (वित्त) सुधांशु द्विवेदी व यूपी स्टेट सेक्टर पावर इंप्लाइज ट्रस्ट के सचिव पीके गुप्ता समेत 17 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

Posted By: Dharmendra Pandey

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