राजेंद्र यादव, प्रयागराज। राजनीति के अखाड़े में अपना लोहा मनवाने वाले तो कई धुरंधर प्रदेश में हैं, लेकिन राज्य सभा सदस्य रेवती रमण सिंह और पूर्व राज्यपाल पं. केशरी नाथ त्रिपाठी का ‘दांव’ आज तक बड़े-बड़े राजनीतिक पंडित नहीं समझ सके हैं। इन दो धुरंधरों ने संगम नगरी से विधानसभा चुनाव में हैट्रिक ही नहीं लगाई, बल्कि कई बार चुनाव जीते। इतना ही नहीं, सरकार में मंत्री बनने के साथ ही विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी भी संभाली।

एक ही सीट से रेवती रमण सिंह ने आठ बार दर्ज की थी जीत

पहले बात करते हैं समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह की। सबसे पहला चुनाव उन्होंने वर्ष 1974 में करछना विधानसभा से लड़ा और विजयी हुए। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक ही सीट से वह चुनाव लड़ते रहे और आठ बार जीते। विधानसभा का अंतिम चुनाव वर्ष 2002 में लड़ा और विजयी भी हुए। इस दौरान तीन बार उन्होंने मंत्री पद भी संभाला। समाजवादी पार्टी में रेवती रमण सिंह की अहमियत यह है कि पार्टी के हर बड़े निर्णय में वे शामिल रहते हैं। प्रयागराज ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों में भी चुनावी गुणागणित में उनकी राय ली जाती है।

शहर दक्षिणी से पांच बार केशरी नाथ त्रिपाठी ने लहराया है परचम

अब बात करते हैं पूर्व राज्यपाल पं. केशरी नाथ त्रिपाठी की। पहला चुनाव वर्ष 1977 में झूंसी विधानसभा से लड़कर विधानसभा पहुंचे। पहली ही बार में वे मंत्री भी बन गए। इसके बाद उनके राजनीति जीवन का उतार-चढ़ाव बना रहा। वर्ष 1989 में सीट बदली और शहर दक्षिणी विधानसभा से मैदान में उतरे। विजयी होने के साथ ही उन्होंने इसी सीट से हैट्रिक ही नहीं लगाई, बल्कि पांच बार लगातार विधायक चुने गए। इतना ही नहीं वर्ष 1991, 1997 अौर 2002 में उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी संभाली। भारतीय जनता पार्टी के बड़े-बड़े दिग्गज आज भी उन्हें राजनीतिक अखाड़े पहलवान मनाते हैं।

माफिया की खिसकती गई जमीन

राजनीतिक अखाड़े में एक समय माफिया अतीक अहमद की तूती बोलती थी। एक ही सीट से पांच बार लगातार विधायक बनकर उसने भी सियासत के गलियारे में ऐसी हलचल मचाई कि कई दिग्गजों के माथे पर पसीना आ गया था। लेकिन करीब 17 साल पहले पूर्व विधायक राजू पाल की हत्या के बाद से माफिया की जमीन खिसकती गई और आज तक वह इससे उबर नहीं पाया। हर चुनाव में शिकस्त ही मिली। हालात ऐसे हैं कि कोई भी बड़ी राजनीतिक पार्टी माफिया अतीक अहमद को अपने साथ नहीं लाना चाहती।

Edited By: Ankur Tripathi