इलाहाबाद (जेएनएन)। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2018 के रिजल्ट पर हंगामा मचा है। मॉडरेशन आदि के जरिये अंक लुटाकर सफलता प्रतिशत दुरुस्त करना किसी के गले नहीं उतर रहा है। इसी पखवारे में बोर्ड प्रशासन को दोनों परीक्षाओं के दस-दस टॉपरों की उत्तर पुस्तिकाएं वेबसाइट पर अपलोड करना है, ताकि अन्य छात्र-छात्राएं सवालों का जवाब लिखने की प्रेरणा पा सकें। ताजा माहौल में यह कदम भी बोर्ड की परेशानी बढ़ाएगा। इसमें मूल्यांकन के अलावा बोर्ड की साख एक बार फिर कसौटी पर होगी।

माध्यमिक शिक्षा परिषद यानि यूपी बोर्ड ने लंबे समय बाद टॉपरों की अधिकृत सूची जारी की है, वरना पिछले कुछ वर्षों में बोर्ड प्रशासन मीडिया की सहूलियत के लिए टॉपर के नाम व मोबाइल नंबर मुहैया कराता रहा है, अधिकृत तौर पर टॉपर का एलान नहीं करता था। इसकी वजह यह थी कि 2010-11 में इंटर में अधिक अंक को लेकर परीक्षार्थियों में विवाद हो गया था। खास विषय से परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले ने दावा किया था कि उसके अंक अधिक है इसलिए उसे टॉपर घोषित किया जाए। विवाद इतना बढ़ा कि बोर्ड ने टॉपर सूची जारी करने से ही तौबा कर लिया। इस बार उससे भी एक कदम आगे बढ़कर मेधावी छात्र-छात्राओं की कॉपियां सार्वजनिक करने के निर्देश हुए हैं।

हाईस्कूल व इंटर परीक्षा 2018 में जिस तरह रिजल्ट को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं उससे जारी होने वाली उत्तर पुस्तिकाएं अफसरों की परेशानी और बढ़ा देंगी। बोर्ड ने अव्वल आने वाले परीक्षार्थियों की जगह खास विषयों में अच्छे अंक पाने वाले मेधावियों की कॉपी सार्वजनिक करने की तैयारी की। यह भी रणनीति बनी कि उस कॉपी पर मिलने वाले अंक नहीं दिखाए जाएंगे। बोर्ड के इस कदम से शासन की मंशा पूरी नहीं होगी और यह खानापूरी ही कही जाएगी, क्योंकि बिना अंकों की कॉपी अपलोड करने का औचित्य नहीं है।

इससे बेहतर यह है कि जिस तरह बोर्ड परीक्षा के पहले मॉडल प्रश्नपत्र जारी करता है, वैसे ही शिक्षकों से प्रश्नों के मॉडल जवाब तैयार कराकर अपलोड करा दे। अंक वाली कॉपी अपलोड कराने में मॉडरेशन और वे उपाय सार्वजनिक हो जाएंगे, जिनके जरिए रिजल्ट बेहतर हुआ है। इसमें मूल्यांकन सही न हुआ तो भी बोर्ड की किरकिरी होना तय है। बदले हालात में बोर्ड अब नए सिरे से रणनीति बना रहा है।  

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