प्रयागराज, जागरण संवाददाता। केंद्र सरकार ने मिट्टी के चूल्हे और उससे फैलने वाले धुएं को खत्म करने के मकसद से गरीबों को उज्जवला योजना के तहत मुफ्त में गैस सिलिंडर बांटे। लेकिन, घरेलू गैस की बढ़ती कीमतों और घटती सब्सिडी के कारण ज्यादातर गरीबों की हैसियत सिलिडंर भराने की नहीं रह गई। इसकी वजह से जिले में करीब 2.30 लाख कनेक्शनधारक गैस सिलिंडर नहीं भरा पा रहे। ऐसे में अब भी महिलाओं को मिट्टी के चूल्हे पर ही लकड़ी और उपले में खाना बनाना पड़ रहा है।

आयल कंपनियों द्वारा अभियान चलाकर दिए गए थे सिलिंडर

केंद्र में पहली बार मोदी सरकार के बनने पर उज्जवला योजना के तहत गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों को मुफ्त में गैस सिलिंडर बांटे गए। आयल कंपनियों द्वारा अभियान चलाकर जिले में 4,635,19 लाभार्थियों को गैस सिलिंडर दिए गए। इसमें इंडियन आयल कारपोरेशन (आइओसी) के 204042, भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन (बीपीसी) के 83770 और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन (एचपीसी) के 463519 लाभार्थी हैं। मौजूदा समय में घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 937.50 रुपये है। लेकिन, सब्सिडी घटकर महज 48 रुपये रह गई। विभाग के पास गैस सिलेंडर न भरा पाने वाले उज्जवला कनेक्शनधारकों की वास्तविक संख्या नहीं है।

सब्सिडी भी घटती गई लगातार

माना जा रहा है कि गैस की बढ़ती कीमतों के कारण करीब 50 फीसद लाभार्थी सिलिंडर नहीं भरा पा रहे हैं। योजना से जुड़े अफसरों का भी मानना है कि जिस तबके के लोग उज्जवला के लाभार्थी हैं, उनकी पहली प्राथमिकता रोजमर्रा की चीजें मसलन बच्चों के लिए दूध, बिस्किट, आटा, चावल आदि की व्यवस्था करना है। बहुत से ऐसे भी लाभार्थी हैं जो सत्तू खाकर अपना पेट भरते हैं। ऐसे में इतना महंगा गैस सिलिंडर वह कहां से भरा सकेंगे। बता दें कि पहले गैस सिलेंडर पर सब्सिडी भी करीब तीन-चार सौ रुपये तक मिलती थी, जो धीरे-धीरे घटकर 50 रुपये के अंदर आ गई।

Edited By: Ankur Tripathi