प्रयागराज,जेएनएन । मंडल के कौशांबी जिले में प्राथमिक विद्यालयों में पढऩे वाले 12 फीसद बच्चे भूखे पेट स्कूल जाने के लिए मजबूर हैं। इसके अलावा करीब 65 फीसद बच्चे सुबह बासी रोटी और चाय पीकर स्कूलों में पढऩे जाते हैं। यह चौंकाने वाला तथ्य प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय की टीम के सर्वेक्षण में सामने आया है। कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव के निर्देशन में यह सर्वेक्षण किया गया।

आलमचंद गांव में हुए सर्वेक्षण में सामने आया चौंकाने वाला तथ्‍य

कुलपति के मुताबिक उनकी टीम ने पिछले महीने कौशांबी के आलमचंद गांव में सर्वेक्षण किया। इस दौरान पूछताछ के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। प्राथमिक विद्यालयों में पढऩे वाले 65 फीसद बच्चे सुबह बासी रोटी व चाय पीकर और 12 फीसद बच्चे भूखे पेट स्कूल जाते हैं। यह भी जानकारी मिली कि बच्चों को हफ्ते में तीन दिन ही दाल खाने को मिलती है। जिन बच्चों के घरों में जानवर पाले जाते हैं, उन्होंने बताया कि जब जानवर अधिक दूध दे रहे होते हैं तब कभी-कभी मां उन्हें दूध पीने को देती हैं। कुलपति का कहना है कि खेती पर ही निर्भर ज्यादातर किसानों के परिवार को हरी सब्जी भी खाने को नहीं मिलती। उचित पोषण न मिलने से उनका शरीर तो कम विकसित होगा ही मस्तिष्क पर भी असर पड़ेगा।

हीमोग्लोबिन की पाई गई कमी

सर्वेक्षण के दौरान बच्चों का रक्त परीक्षण भी कराया गया। इसमें 12 से 15 वर्ष की उम्र की 200 लड़कियां और 200 लड़के थे। 8.77 फीसद लड़के एनीमिक मिले। 15 वर्ष से अधिक उम्र के लड़कों में यह औसत 5.26 फीसद रहा। लड़कियों में 64.6 फीसद ऐसी थीं, जिनमें हीमोग्लोबिन कम मिला।

Posted By: Brijesh Srivastava

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