प्रयागराज, जागरण संवाददाता। संगम क्षेत्र में अचानक गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से दो दर्जन से अधिक शिविर में पानी भर गया है। शिविरों में पानी भर जाने से कल्पवासियों और साधु-संतों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गंगा का जलस्तर इसी तरह से बढ़ता रहा तो तट पर बसाए गए शिविरों को हटाना पड़ सकता है। सेक्टर दो और तीन में कई गाटा मार्ग पानी में डूब गए हैं।

कटान रोकने के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक का हुआ है टेंडर

काली मार्ग पुल नंबर तीन और त्रिवेणी मार्ग पुल नंबर दो पास वाले कई शिविरों में पानी भर जाने से लोगों ने शिविर में रखे सामान को दूसरे स्थान पर सुरक्षित पहुंचाया। सिंचाई विभाग की मानें तो संगम क्षेत्र में दो तीन दिनों तक जलस्तर और बढ़ सकता है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कानपुर बैराज से तीन दिन पहले लगभग 20 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। वह पानी सोमवार को भोर में संगम क्षेत्र पहुंचने लगा। सुबह आठ बजे तक कई शिविर पानी भर गया। तेजी से शिविर में पानी प्रवेश करने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। सेक्टर दो, तीन और चार में स्नान घाट भी पानी में बह गए थे। दो दिनों भीतर 100 बीघा से अधिक जमीन गंगा में समा गई है।

कहां गई जियो ट्यूब

माघ मेला में सिंचाई विभाग ने पहली बार कटान रोकने के लिए जियो ट्यूब लगाने का निर्णय लिया। दस लाख रुपये से अधिक का टेंडर दो माह पहले किया गया लेकिन अभी तक यह ट्यूब नहीं दिखाई पड़ी। इस ट्यूब से दो किलो मीटर के दायरे में कटान आसानी से रोका जा सकता है। आखिर टेंडर होने के बावजूद किस कारण से सिंचाई विभाग यह ट्यूब नहीं लगवा रहा है। सिंचाई विभाग को तीन किलो मीटर के दायरे में कटान रोकने के लिए लगभग एक करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। इसके बावजूद कटान रोकने में यह विभाग विफल हो रहा है।

पुल सुरक्षित करने के लिए लगाई बोरिया

गंगा के बढ़ते जलस्तर से पीपा का पुल प्रभावित न हो इसके लिए बोरियों में बालू भर कर पीपा के पास लगाया गया। त्रिवेणी पुल के पास पीडल्यूडी के अवर अभियंता दीपक कुमार द्वितीय और सनातन राय ने दिनभर श्रमिकों से पुल की सुरक्षा का इंतजाम कराते रहे।

Edited By: Ankur Tripathi