प्रयागराज, जागरण संवाददाता। प्रोटीन हमें दिन भर एक्टिव रहने में मदद करते हैं। हमारे शरीर में इससे थकान कम लगती है। कहा जाता है कि नानवेज फूड प्रोटीन रिच होते हैं। हालांकि सावन के महीने में लोग नानवेज खाने से परहेज करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि शरीर को पर्याप्त प्रोटीन कैसे मिल सकता है। प्रयागराज की न्यूट्रीशियन बताती हैं कि हम लोगों को प्रोटीन के शाकाहारी और मांसाहारी दोनों सोर्सेस के बारे में जानकारी होना आवश्यक है।

पौधों में भी प्रोटीन के अच्‍छे स्रोत हैं: न्‍यू‍ट्रीशियन जूमी

न्यूट्रीशियन जूमी सिंह बताती हैं कि हमारी मासपेशियों, हड्डियों, बाल, त्वचा सबको स्वस्थ रखने के लिए प्रोटीन बहुत आवश्यक है। आमतौर पर पशु स्रोत प्रोटीन को पौधे स्रोत प्रोटीन से अच्छा माना जाता है। क्योंकि उसमें ज्यादातर एसेंशियल अमीनो एसिड होते हैं। इसलिए उसको कंप्लीट प्रोटीन कहते हैं। हालांकि पौधों में भी प्रोटीन के अच्छे सोर्स होते हैं, जिसमें अलग-अलग एसेंशियल अमीनो एसिड्स होते हैं। अगर हम इन्हें अपने खाने के साथ लें तो हमें सारे एसेंशियल अमीनो एसिड मिल जाएंगे। जैसे दाल और चावल साथ में लें, दाल चावल की खिचड़ी, इडली सांभर, बींस और चावल साथ में लें इत्यादि। जममी ने कहा कि प्लांट प्रोटीन में सेचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्राल भी कम या न के बराबर होते हैं। जो कि बीमारियां होने से बचाते हैं।

सब्जियों में भी प्रचुर मात्रा में होता है प्रोटीन : न्‍यूट्रीशियन ऋचा

न्यूट्रीशियन ऋचा श्रीवास्तव कहती हैं कि सब्जियाें में फूलगोभी, हरी मटर, मशरूम, ब्रोकली, बींस, पालक में भी प्रोटीन होता है। इसमें हम साेया मटर की सब्जी, पालक पनीर भरा पराठा, मटर का पराठा या मटर की कढ़ी भी बना सकते हैं। कहा कि हमारे शरीर को रोज 0.8 ग्राम से एक ग्राम प्रति किलोग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। सत्तू में भी प्रोटीन प्रचुुर मात्रा में पाया जाता है। इसको हम छाछ में शेक बनाकर पी सकते हैं।

Edited By: Brijesh Srivastava