प्रयागराज [मनीष मिश्र]। मोबाइल, मोबाइल और मोबाइल। यानी मोबाइल से ही सुबह और मोबाइल के इर्द-गिर्द ही शाम और रात हो रही है तो फिर आप मोबाइल के लती हो गए हैं। आपको फौरन उपचार की जरूरत है। वैसे तो इलाज की जरूरत उन सभी को है, जो रोज चार घंटे से ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इसी वजह से नौबत मोबाइल की लत छुड़ाने के तरीके अपनाने तक पहुंच गई है। इसके लिए मोतीलाल नेहरू मंडलीय अस्पताल (काल्विन) में विशेष केंद्र बनाया जा रहा है। सोमवार से यह केंद्र चालू हो जाएगा जो कि प्रदेश का पहला केंद्र होगा। यहां बच्चों के साथ ही बड़े बुजुर्गों का भी इलाज होगा। 

मोबाइल के इर्द गिर्द रहने वालों की स्थिति यह हो चुकी है कि उन्हें बिना मोबाइल के रहने पर घबराहट व बेचैनी होने लगती है। इसका शिकार कोई एक वर्ग नहीं, बल्कि युवा, बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं सभी हैं। इसे ऐसे भी समझिए। जिसे देखिए वही या तो गेम खेलने में लगा है, या यू-ट्यूब, वाट्सएप अथवा फेसबुक पर है। ऐसे में मोबाइल की लत का दुष्प्रभाव घर पर भी पडऩे लगा है।

इस तरह के मामले अस्पताल आने लगे हैं। इसी के चलते काल्विन अस्पताल में 'मोबाइल नशा मुक्ति केंद्र' की व्यवस्था की गई है। सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को यहां नैदानिक मनोवैज्ञानिक ईशान्या राज व जयशंकर पटेल ऐसे लोगों को मोबाइल की लत खत्म करने के उपाय बताएंगे। अभी तक यह केंद्र बंगलुरु व पंजाब में हैं।

प्रदेश का पहला मोबाइल नशा मुक्ति केंद्र

प्रयागराज स्थित काल्विन अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. वीके सिंह ने कहा कि अस्पताल में मोबाइल नशा मुक्ति केंद्र शुरू हो रहा है। यह प्रदेश का पहला केंद्र होगा, जहां लोगों को मोबाइल की लत से निजात दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

यह होगा इलाज का तरीका

काल्विन अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. राकेश पासवान बताते हैं कि हम लोग दो तरह से मोबाइल से छुटकारा दिलाते हैं। बच्चों के लिए 'व्यावहारिक संशोधन तकनीक' का सहारा लिया जाता है। इसमें अभिभावकों की भी मदद ली जाती है। अभिभावक को यह बताते हैं कि वह अपने बच्चे को मोबाइल तभी दें जब बच्चा अभिभावक द्वारा दिए गए निर्धारित समय के अंदर मोबाइल लौटा दे।

इसी तरह बड़ों के लिए 'संज्ञात्मक व्यावहारिक थेरेपी' की मदद ली जाती है। इसमें व्यक्ति से उसके नौकरी, बिजनेस आदि के बारे में पूछते हैं। काउंसिलिंग के बाद जब पुष्टि हो जाती है कि वह मोबाइल का इस्तेमाल अधिक करता है तो उसे खेल, पार्क में घूमने जैसे कामों के लिए प्रेरित करते हैं। बीच-बीच में वस्तुस्थिति जानने के लिए उसे केंद्र पर बुलाया जाता है।

Posted By: Brijesh Srivastava