प्रयागराज, जेएनएन। उत्तर मध्य रेलवे का इलाहाबाद मंडल पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (मुगलसराय) से गाजियाबाद तक विस्तारित है। दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा इसी मंडल के अंतर्गत आता है। ब्रिटिश काल में उत्तर भारत की पहली रेलगाड़ी की शुरूआत इसी मंडल में हुई थी जब फरवरी 1857 में इलाहाबाद से कानपुर रेलखंड पर 41.8 किलोमीटर तक इंजन दौड़ाया गया था जिसके बाद सैन्य टुकड़ी और उसका साजो-सामान पहुंचाने के लिए इस सेक्शन को खोला गया था। इस सेक्शन में तीन मार्च 1859 को आम लोगों के लिए ट्रेन संचालन शुरू हुआ।

 
1852 में शुरू हुआ था इलाहाबाद से कानपुर के बीच ट्रैक का काम
अक्टूबर 1845 में ग्रेट नार्थ ऑफ इंडिया रेलवे कंपनी (जीएनआइआर) ने इलाहाबाद से दिल्ली के बीच रेल लिंक का प्रस्ताव किया था, बाद में यह कंपनी ईस्ट इंडियन रेलवे में मर्ज हो गई और इस लाइन को बनाने की अनुमति मिली। 1852 में इलाहाबाद से कानपुर के बीच लाइन का काम शुरू हुआ लेकिन ठेकेदारों के आपसी विवाद, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम शुरू होने व कोलकाता से निर्माण सामग्री इलाहाबाद तक लाने में समस्या के चलते टै्रक बिछाने में इंजीनियर्स को दिक्कत उठानी पड़ी। नावों से सामान लाने में दिक्कत के चलते ईस्ट इंडियन रेलवे ने अपने स्टीमर तैयार कराए जिससे टै्रक बिछने में विलंब हुआ।

1952 में ईस्ट इंडियन रेलवे से उत्तर रेलवे को मिला उत्तराधिकार
वर्तमान में इलाहाबाद मंडल उत्तर मध्य रेलवे जोन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुगलसराय से गाजियाबाद तक पडऩे वाला यह क्षेत्र सन् 1952 के पहले तक ब्रिटिश कंपनी ईस्ट इंडियन रेलवे का हिस्सा था। देश के आजाद होने के बाद 1952 में रेलवे क्षेत्र का पुनर्गठन किया गया जिसमें यह उत्तर रेलवे के अधिकार क्षेत्र में आ गया। एक अप्रैल 2003 में उत्तर मध्य रेलवे की स्थापना की गई, इलाहाबाद को मुख्यालय बनाया गया। तब इलाहाबाद, झांसी के अलावा नए मंडल आगरा को उत्तर मध्य रेलवे जोन में शामिल कर दिया गया।


अब दो सौ से अधिक यात्री ट्रेनें और मालगाडिय़ां दौड़ती हैं
उत्तर मध्य रेलवे के इलाहाबाद मंडल में वर्तमान समय में 200 से अधिक पैसेंजर टे्रनें व मालगाडिय़ां दौड़ती हैं। गाजियाबाद से लेकर मुगलसराय तक विस्तृत इस मंडल में पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन (मुगलसराय), मीरजापुर, विंध्याचल, नैनी, प्रयागराज, कानपुर, इटावा, अलीगढ़, गाजियाबाद जैसे सैकड़ों स्टेशन और हाल्ट हैं। उत्तर मध्य रेलवे के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी डा.अमित मालवीय के अनुसार वर्तमान में इस रूट से चलने वाली तमाम टे्रनें 130 किमी. प्रतिघंटे की गति से गुजरती हैं जिनको 160 किमी. प्रति घंटे तक बढ़ाने पर काम चल रहा है। उक्त क्रम में ट्रैक व अन्य उपकरणों को आधुनिक किया जा रहा है। यात्री सुविधाएं भी बढ़ाई जा रही हैं।

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