प्रयागराज: वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के लागू होने पर जीएसटी काउंसिल ने ई-वे बिल की सीमा (एक समान) 50 हजार रुपये तय किया था। लेकिन कुछ राज्यों ने इस सीमा को बढ़ाकर एक और पांच लाख रुपये तक कर दिया है। ऐसे में सूबे में भी ई-वे बिल की सीमा बढ़ाने की मांग व्यापारियों की ओर से की जा रही है। साथ ही सवाल भी खड़े किए जा रहे हैं कि इससे जीएसटी काउंसिल के निर्णयों में एकरूपता कहां रह गई।

  दरअसल, महाराष्ट्र में ई-वे बिल की सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी गई। जबकि दिल्ली, मध्यप्रदेश, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में यह सीमा बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई है। मध्य प्रदेश में तो जिले के अंदर माल भेजने पर ई-वे बिल भी नहीं लगता है। हालांकि, यूपी में ई-वे बिल की सीमा अभी भी 50 हजार रुपये है। जिसे बढ़ाने की मांग व्यापारी वाणिज्य कर विभाग के कमिश्नर और मुख्यमंत्री से कर रहे हैं।

  उत्तर प्रदेश व्यापार कल्याण समिति के प्रदेश संयोजक संतोष पनामा का कहना है कि अन्य राज्यों में सीमा बढ़ा दी गई है तो यहां क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा है। इससे बड़े व्यापारियों की उलझनें बढ़ेंगी। उनमें इस बात को लेकर भी आक्रोश पनप रहा है कि उन्हें सुविधा का लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि यदि दूसरे राज्यों ने ई-वे बिल की सीमा बढ़ा दी है तो जीएसटी काउंसिल के निर्णय में एकरूपता कहां रह गई है।

Posted By: Brijesh Srivastava

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