जासं, प्रयागराज : मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गुरुवार को महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु मामले की फाइल सेशन कोर्ट को सुपुर्द कर दी। अब सेशन कोर्ट में इस मामले का परीक्षण होगा।

महंत को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी के विरुद्ध सीबीआइ ने आरोप पत्र दाखिल किया था, जिस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हरेंद्र नाथ ने संज्ञान लिया था। क्योंकि मामला सत्र न्यायालय द्वारा परीक्षण ही अपराध से संबंधित है, यह घोषित करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले के परीक्षण के लिए फाइल सेशन कोर्ट को सुपुर्द किए जाने का आदेश दिया। वीडियो कांफ्रेंसिग के माध्यम से जेल से पेश किए गए आरोपितों को अदालत ने बताया कि उनकी पत्रावली अब सत्र न्यायालय में प्रस्तुत होने के लिए सुपुर्द की जा रही है, जहां पर छह दिसंबर को यह पेश होगी। अभियोजन की ओर से कागजात और आरोप पत्र की नकलें आरोपितों को नैनी सेंट्रल जेल में प्रदान की जा चुकी है। आनंद गिरि ने कोर्ट से कहा कि अधिवक्ताओं को जेल प्रशासन द्वारा मुझसे मिलने नहीं दिया जा रहा है कृपा करके अधिवक्ताओं से मेरी मुलाकात करवा दीजिए। मजिस्ट्रेट ने कहा मिलने की अर्जी इस न्यायालय में किसी अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत नहीं की गई है। अब मामला सत्र न्यायालय द्वारा परीक्षणीय है। जब आप के ऊपर आरोप तय होगा तब आपको अपनी बात रखने का मौका सत्र न्यायालय द्वारा दिया जाएगा। 152 लोगों को बनाया गया गवाह-

अभियुक्त आनंद गिरि के अधिवक्ता विजय द्विवेदी ने बताया कि सीबीआइ ने इस मुकदमे में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी के अलावा कई बड़े संतों को गवाह बनाया है। साथ ही सपा नेता, भाजपा नेता, एडिशनल एसपी, बिल्डर, मठ और मंदिर से जुड़े कुल 152 लोगों को गवाह बनाया गया है। चार्जशीट भी इन्हीं लोगों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर तैयार की गई है।

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