प्रयागराज, जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आठ साल की बालिका के साथ दुष्कर्म में आरोपित मुरादाबाद निवासी अजबिंदर की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। आरोपित का कहना था कि पीड़िता के माता-पिता ने दुष्कर्म के आरोपों की पुलिस स्टोरी को सही नहीं माना और गवाहों ने भी अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया है, किंतु कोर्ट ने चिकित्सा साक्ष्य के आधार पर अपराध को गंभीर माना और जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने विचारण न्यायालय को आदेश दिया कि आपराधिक मामले बिना देरी छह माह में निस्तारित करें।

यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह ने दिया है। याची के खिलाफ कटघर थाने में बालिका से दुष्कर्म के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। घटना के दिन 22 मार्च, 2017 को ही आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। याची का कहना था कि पीड़िता के मां-बाप ने भी अभियोजन पक्ष के आरोपों को सही नहीं माना है। अन्य गवाहों ने भी समर्थन नहीं दिया। ऐसे में उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए।

सरकारी अधिवक्ता का कहना था कि विचारण न्यायालय के समक्ष चिकित्सकीय साक्षी उपलब्ध हैं, जो बालिका के साथ दुष्कर्म की घटना की पुष्टि करते हैं। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट और मौखिक साक्ष्य दोनों में विरोधाभास हो सकता है, इस संबंध में विचारण न्यायालय द्वारा विचार किया जाए, क्योंकि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को मेडिकल साक्ष्यों से बल मिलता है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर दंड दिया जा सकता है। ऐसे में जमानत पर छोड़े जाने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी है।

Posted By: Umesh Tiwari

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