प्रयागराज, जागरण संवाददाता। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के गोरक्षा विभाग ने बेसहारा, घायल गोवंशों को चारा, पानी व चिकित्सकीय मदद पहुंचाने के लिए गोसेवा सचल वाहन की शुरुआत की है। शनिवार को स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने अलोपीबाग स्थित आश्रम में गोवंश को गुण खिलाकर वाहन को हरी झंडी दिखाई। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि जिस धरती पर श्रीकृष्ण ने गोसेवा की, जहां दूध दही की नदियां बहती थीं, आज उसी धरती पर गोमाता बेसहारा होकर ठोकर खा रही हैं।

धरती पर सबसे पुनीत कार्य गोसेवा : स्‍वामी वासुदेवानंद सरस्‍वती

स्‍वामी वासुदेवानंद सरस्‍वती ने कहा कि इस धरा पर सबसे पुनीत कार्य गोसेवा है। उन्होंने गोरक्षा विभाग की सराहना की। उन्‍होंने कहा कि अब निश्चित ही बेसहारा व घायल गोवंशजो को नया जीवन मिलेगा। अन्य समाजसेवी संस्थाओं को भी गोसेवा के जैसे पुनीत कार्य करने चाहिए। यदि ऐसा होता है तो सड़कों पर गोमाता बेसहारा होकर नहीं भटकेंगी।

विहिप गोरक्षा विभाग के प्रांत मंत्री ने दी जानकारी

विहिप गोरक्षा विभाग के प्रांत मंत्री लाल मणि तिवारी ने कहा कि प्रयागराज की धरती पर गोवंशजों की रक्षा के लिए विहिप के गोरक्षा विभाग के महानगर उपाध्यक्ष सौरभ सिंह की देखरेख में यह गोसेवा सचल वाहन चलेगा। जल्द ही वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। सभी गोसेवकों को इस अभियान का हिस्सा बनना चाहिए। इस दौरान गोरक्षा विभाग के प्रांत अध्यक्ष भोला नाथ मिश्र, अमरनाथ तिवारी, अमित सिंह, अवधेश राय, ओम प्रकाश ओझा चंद्रशेखर, नितिन भारद्वाज, प्रदीप तिवारी पिंटू आदि मौजूद रहे।

पंच गव्य के प्रयोग से कैंसर व चर्मरोग का इलाज संभव

गाय के दूध, घी, दही, गोबर और मूत्र से पंच गव्य बनता है। इसमें बहुत से औषधीय गुण होते हैं। विश्व आयुर्वेद मिशन के अध्यक्ष डा. जीएस तोमर ने बताया कि पंच गव्य के प्रयोग से कैंसर व चर्मरोग का इलाज संभव है। चर्मरोग के इलाज में गो मूत्र भी लाभकारी होता है। इसमें भी कैंसर को रोकने की क्षमता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में यह सहायक है। अस्थमा व गठिया के इलाज में भी लाभकारी होता है। गोमूत्र बाजार में गो अर्क के नाम से उपलब्ध है। ग्लासगो यूनिवर्सिटी के प्रो. हरि मोहन शर्मा के शोध में पता चला है कि गाय का दूध, घी औषधीय गुण रखता है। यह कोलस्ट्राल को घटाने में भी सहायक है। हृदय रोगी इसे जरूर लें। इसके अतिरिक्त सावन के महीने में पंच गव्य का प्रयोग बहुत लाभकारी होता है। शरीर की शुद्धि के लिए इसका प्रयोग करना चाहिए। यह किसी वैक्सीन की तरह काम करता है। यदि सावन भर इसका प्रयोग करें तो पूरे वर्ष हम किसी भी बीमारी से बचे रह सकेंगे।

Edited By: Brijesh Srivastava