प्रयागराज,जेएनएन। जिले की औद्योगिक इकाइयां कामगारों की कमी से ही नहीं, बल्कि बाजार बंद होने और कच्चा माल न मिलने से भी मुश्किल में हैं। जो कच्चा माल पहले के रखे थे, उसी से उत्पादन हो रहा है। मशीनरी पाट्र्स न मिलने और इंजीनियरों के न आ पाने से कई यूनिटें भी बंद हो गई हैं। इकाइयों, बाजार और ग्राहकों के बीच आपूर्ति चेन की जो कड़ी बनी थी, वह लॉकडाउन के कारण टूट चुकी है। इन कडिय़ों को जुडऩे में कम से कम दो-तीन महीने लगने की उम्मीद है।

पैकिंग के भी सामान नहीं मिल रहे

पैकेजिंग से संबंधित जो इकाइयां हैं, उन्हें पैकिंग के भी सामान नहीं मिल पा रहे हैं। इससे माल की पैकिंग ही नहीं हो पा रही है। बगैर पैकिंग के ग्राहक को आपूर्ति संभव नहीं है। 

प्रोसेसिंग खर्च भी नहीं निकल रहा

आटा, मैदा, चोकर की बिक्री न होने से फ्लोर मिल मालिक भी परेशान हैं। गेहूं का रेट चढ़ जाने से इन चीजों के प्रोसेसिंग का खर्च भी नहीं निकल रहा है। एलसी फूड्स लिमिटेड के निदेशक शोभित केसरवानी का कहना है कि सरकार जो गेहूं गरीबों को बंटवा रही है। उसे मिल मालिकों को दे दे और उसकी जगह प्रोसेसिंग कराकर आटा का वितरण कराए, तो फ्लोर मिलें भी चलती रहें।

रॉ मैटेरियल मिलने में अड़चनें

नैनी एयरोस्पेश लिमिटेड के सीईओ आरके मिश्रा का कहना है कि रॉ मैटेरियल बेंगलुरु से आता है, जो लॉकडाउन के कारण नहीं आ पा रहा है। बाजार बंद होने से आवश्यकता की चीजें नहीं मिल पा रही हैं। जो रॉ मैटेरियल था, उसी से उत्पादन हो रहा है। इस महीने के बाद रॉ मैटेरियल की जरूरत पड़ेगी। अगर रॉ मैटेरियल नहीं उपलब्ध हुआ तो समस्या खड़ी हो जाएगी। लॉकडाउन के बाद जब से कंपनी शुरू हुई, बुधवार को पहली बार धु्रव हेलीकॉप्टर के ढांचे की डिलीवरी बेंगलुरु की गई।

सामानों की बिक्री न होने से 10 फीसद भी उत्पादन नहीं

मल्टी बॉक्स प्राइवेट लिमिटेड डायरेक्टर हेमंत मोदी ने बताया कि जो रॉ मैटेरियल पहले से था, उसी से उत्पादन हो रहा है। लेकिन ग्राहकों द्वारा माल न खरीदने से इकाई में 10 फीसद भी उत्पादन नहीं हो रहा है। माल की आपूर्ति न होने से रॉ मैटेरियल की जरूरत नहीं पड़ रही है। अन्यथा रॉ मैटेरियल की भी दिक्कत हो जाती। औद्योगिक क्षेत्र में कारबोरेटेड बॉक्स की बड़ी इकाई लगा रहे हैं, लेकिन उसके शुरू होने में अभी तीन-चार महीने लगेंगे।

मशीनरी पाटर्स न मिलने से यूनिट बंद

तिरुपति बेकर्स प्राइवेट लिमिटेड डायरेक्टर संजय रत्नानी ने बताया कि इकाई चलाने की अनुमति मिली तो जो संसाधन थे, उससे शुरू कर दिया गया। रॉ मैटेरियल की बहुत समस्या नहीं है, लेकिन मशीनरी पाट्र्स न मिलने से बेहद परेशानी हो रही है। इंजीनियरों के न आ पाने से मशीनें बंद पड़ी हैं। आटोमेशन के कारण भी यह यूनिट बंद पड़ी है। एक जॉली मुंबई से आकर लखनऊ में एक सप्ताह से अटकी है। इसका काम बिस्किट को ठंडा करके पैकिंग मशीन की तरफ भेजने का है। 

खास तथ्‍य

-10 फ्लोर मिल

-10 राइस मिल

-10-30 फीसद तक इकाइयों में उत्पादन

Posted By: Brijesh Srivastava

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