ज्ञानेंद्र सिंह, प्रयागराज: एमबीए चाय वाला...अहमदाबाद में एमबीए की पढ़ाई पूरी न कर पाने से उदास प्रफुल्ल बिल्लौर की इस नई पहचान से आज पूरा देश वाकिफ है और इस व्यवसाय से उनकी करोड़ों की कमाई से भी। यह तो है 2017 में स्वरोजगार की दिशा में बढ़ने वाले एक उत्साही युवक के संघर्ष की कहानी...

मगर कोई और भी है, जो उनसे भी पहले संघर्ष की पथरीली राहों पर चलकर सफलता का आसमान चूमने की ऐसी ही कहानी गढ़ चुका है। यह है संगमनगरी की युवा बेटी अंकिता गौर...'एमबीए मसाले वाली'

हालांकि उनका ब्रांड नाम यह नहीं है बल्कि ग्‍योर मसाला है। 10 साल पहले 80 हजार रुपये पूंजी लगाकर अंकिता करोड़ों रुपये का मसाला का कारोबार कर चुकी हैं। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की मदद से मसाले में सफलता के बाद वह 50 से ज्‍यादा उत्‍पाद को बाजार दे रही हैं।

अपने उत्‍पाद के साथ अंक‍िता गौर। जागरण

150 करोड़ से लगाएंगी खिलौनों की इंडस्ट्री

अब उनका लक्ष्य खिलौना है। वह 150 करोड़ रुपये से खिलौनों की इंडस्ट्री लगाने जा रही हैं। अगले महीने होने वाले इन्वेस्टर्स समिट के लिए इसका निवेश प्रस्ताव भी तय हो चुका है। अंकिता इस नए कारोबार से खिलौना उद्योग में चीन के एकाधिकार को खत्म करने का इरादा रखती हैं।

2012 में एमबीए पास कर उद्यम लगाया

झूंसी में रहने वाले सेवानिवृत्त सुधीर गौर की बेटी 32 वर्षीय अंकिता ने वर्ष 2012 में एमबीए की पढ़ाई पूरी करने दो माह बाद ही उद्यम लगा लिया। 40 हजार रुपये में चक्की खरीदी और 25 हजार रुपये के खड़ा मसाले लिए। लगभग 15 हजार रुपये अन्य कार्यों में लगाया। शहर में ही बैंक रोड पर एक कमरा किराए पर लेकर यह उद्यम शुरू किया। शुरू में मसाले पीसकर उन्होंने होटल, रेस्टोरेंट तथा अच्छे ढाबों में पहुंचाया। दो युवकों और तीन युवतियों को नौकरी दी।

मसाला और अन्‍य सामानों के पैके‍जिंग के बारे में बतातीं युवा अंंक‍ि‍ता गौर। जागरण

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से मिला ऋण

तमाम परेशानियां झेलने के बावजूद अंकिता ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक वर्ष बाद ही पैकिंग और पाउच बनाने वाली मशीन खरीद ली। केरल जाकर मसालों की पूरी जानकारी ली। लगभग तीन वर्ष बाद 2015 में नैनी इंडस्ट्रियल एरिया में किराए पर एक बंद फैक्ट्री को लिया। वर्ष 2017 में वहां यूनिट लगाई। इसी बीच प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की सहायता से उन्हें बैंक से 12 लाख रुपये का ऋण मिल गया। अब उनकी यूनिट में 38 महिलाएं और 16 पुरुष काम कर रहे हैं। वह तीन करोड़ रुपये सालाना कमाती हैं, टर्नओवर इससे भी ज्यादा है।

मसाला फैक्‍ट्री में मशीनों के बारे में जानकारी देतीं अंकि‍ता गौर। जागरण

उप्र और मध्य प्रदेश को देंगी खिलौनों का बाजार

अंकिता अब खिलौनों की बड़ी इंडस्ट्री लगाने जा रही हैं। वह चीन के एकाधिकार को तोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश को नया बाजार देंगी। इसमें भी वह ज्यादातर महिलाओं को ही रखेंगी। इस फैक्ट्री का प्रस्ताव इन्वेस्टर्स समिट में ले लिया गया है। अंकिता ने बताया कि उनका लक्ष्य है कि खिलौनों को निर्यात भी करेंगी। प्रयागराज को खिलौनों का बाजार बनाएंगी। अभी तक खिलौनों के बाजार पर चीन की पकड़ ज्यादा है।

मन में ठान लेने से ही आधी जीत हो जाती है

भारत में दिल्ली के सदर बाजार, कर्नाटक के रामनगर में चन्नापटना, आंध्र प्रदेश के कृष्णा में कोंडापल्ली, तमिलनाडु में तंजौर, असम में धुबरी और वाराणसी में भी खिलौने की मार्केट हैं। इसी तरह का बाजार प्रयागराज में भी होगा, जहां से पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ ही बुंदेलखंड व मध्य प्रदेश के कई शहरों में खिलौने भेजे जा सकेंगे। अंकिता कहती हैं, अगर आपने यह मन में ठान लिया कि आप कर सकते हैं तो इसी में आपकी आधी जीत हो जाती है।

Edited By: MOHAMMAD AQIB KHAN

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट