प्रयागराज, [गुरुदीप त्रिपाठी]। मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआइटी) के 20 छात्रों ने कबाड़ का सदुपयोग कर कमाल कर दिया। इससे एक सीट वाली रेसिंग कार गो कार्ट बनाई है। ये सभी बीटेक इन मैकेनिकल एंड प्रोडक्शन ब्रांच के छात्र हैं। छात्र इस कार को देशभर के टेक फेस्ट में होने वाली गोकार्ट प्रतियोगिता में उतारेंगे।

100 किलो का लोड लेकर चल सकती है कार

संस्थान में तैयार की गई रेसिंग कार के बारे में छात्र सौरभ सिंह ने बताया कि 90 किलो वजन की इस 'गो कार्ट में 125 सीसी का इंजन लगाया गया है। यह 100 किलो का लोड लेकर चल सकती है। पेट्रोल से चलने वाली यह कार एक लीटर में 35 किलोमीटर चलती है। अधिकतम स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसे यह सात सेकंड में पकड़ लेती है। कार की लागत सिर्फ एक लाख रुपये है, जबकि बाजार में यह एक लाख तीस हजार रुपये तक में मिलती हैं। छात्रों ने यह कार तीन माह में तैयार की। वह इसका संस्थान में ट्रायल कर चुके हैं। चंडीगढ़ स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में मार्च 2020 में आयोजित होनेे वाली इंटरनेशनल गोकार्ट कंप्टीशन में वह इसे दौड़ाएंगे।

हादसे से बचाएगा एल्कोहल सेंसर

इसमें एल्कोहल सेंसर लगा है। यदि कोई नशे में रहेगा तो कार नहीं चलेगी सीट बेल्ट का इस्तेमाल न करने पर भी कार नहीं चलेगी। छात्रों ने समरम नाम का एक मोबाइल एप भी बनाया है। आइओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग) की मदद से वह इस एप से स्पीड और लोकेशन आसानी से जान सकेंगे।

कम है आगे के टायरों की दूरी

सौरभ ने बताया कि कार में हैैंड गियर सीट के पीछे है। इसमें इलेक्ट्रानिक गियर सिस्टम है, जिसे बटन के सहारे बदल सकेंगे। आगे के टायरों के बीच दूरी कम और पीछे के टायरों में दूरी अधिक रखी गई है। इससे गाड़ी ट्रैक पर जल्द मुड़ सकेगी।

टीम में ये हैं शामिल

रेसिंग कार गो कार्ट तैयार करने वाली टीम में फैकल्टी एडवाइजर जितेंद्र गंगवार के अलावा कैप्टन शिशिर अग्रहरि व वाइस कैप्टन मानस श्रीवास्तव, उत्कर्ष शर्मा, अजय पाटीदार, उमंग जैन, गौरांक पांडेय, अश्वनी जायसवाल, अहमद यूसुफ, थॉमस, हार्दिक चुग, राधे, रवि, अमन झावर, सौरभ सिंह, पीयूष प्रताप सिंह, नीरज बलानी, पीयूष पटेल, शशांक तिवारी, श्रेया, मणि संगुरी और दीक्षा शामिल हैं।

 

Posted By: Brijesh Srivastava

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