जासं, इलाहाबाद : अयोध्या स्थित रामजन्म भूमि में राम मंदिर निर्माण के लिए निकाली गई रामराज्य रथ यात्रा का गुरुवार शाम कटरा के मनमोहन पार्क चौराहे पर भव्य स्वागत किया गया। रथ पर रखी राम सीता व अंजनी पुत्र की विधि-विधान से पूजा एवं आरती की गई। इस दौरान राम भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा और राम के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो गया। अयोध्या से रामेश्वरम के लिए निकाली गई यात्रा वाराणसी होते हुए गुरुवार शाम मनमोहन पार्क चौराहे पर पहुंची। इस दौरान यात्रा में शामिल साधु-संतों को माला पहनाकर अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर यात्रा का नेतृत्व कर रहे शक्ति शांतानंद महर्षि ने कहा कि यह यात्रा मुख्य उद्देश्य राम मंदिर निर्माण के लिए जन जागरूकता लाना है। यह यात्रा 41 दिन में रामेश्वरम पहुंचेगी। फिर अगले साल देश भर में भ्रमण करते हुए अयोध्या वापस लौटेगी, तब तक राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाए, यही इस यात्रा का उद्देश्य है। बताया कि यात्रा छह राज्यों से होते हुए लगभग छह हजार किमी की दूरी तय कर रामेश्वरम और आगे कन्याकुमारी के तिरुवनंतपुरम में समाप्त होगी। यात्रा पांच ज्योतिर्लिग, 36 तीर्थक्षेत्र, कई महासमाधियां और हजारों मंदिरों से होकर जाएगी। उन्होंने कहा कि रामराज्य की पुन: स्थापना के लिए राम मंदिर का निर्माण आवश्यक है। कहा कि कुछ लोग इस यात्रा को राजनीति से प्रेरित बताते हैं। हां, इस यात्रा में राजनीति है मगर किसी पार्टी की नहीं बल्कि इसमें राम की राजनीति है, रामराज्य की राजनीति है और अयोध्या की राजनीति है। कहा कि जिस भी पार्टी को वोट चाहिए तो वह राम के पीछे आ जाए। कहा कि इस यात्रा में भाजपा, कांग्रेस, कम्यूनिस्ट या अन्य दलों का हाथ नहीं है। कहा कि रामराज्य की स्थापना से ही मानवराज्य आएगा और दानव राज खत्म होगा। स्वागत करने वालों में विहिप के प्रांत संगठन मंत्री मुकेश, प्रांत उपाध्यक्ष विनोद अग्रवाल, महानगर अध्यक्ष अजय गुप्ता, जिला मठ-मंदिर प्रमुख शिवम द्विवेदी, रजनीश, विजय पांडेय, अमित पाठक, किशन जायसवाल, बृजराज तिवारी, सुरेश अग्रवाल, विजय पांडेय, रतन खरे, बृजलाल तिवारी आदि शामिल थे। चलता-फिरता मंदिर है रामरथ रामराज्य रथ चलता-फिरता मंदिर है। यह राम जन्मभूमि में बनने वाले रामंदिर के अनुरूप बना है। इसमें रामसीता व आंजनेय की मूर्तियां, नंदीग्राम से लाए गए राम पादुका, श्रीलंका से लाया गया सीताचूडामणि, रामेश्वर से लाया गया ध्वज और मुकांबिका देवी मंदिर कोल्लूर, कर्नाटक से लाया गया अखंड ज्योति भी है। यात्रा के पांच प्रमुख उद्देश्य -रामजन्म भूमि में राम मंदिर निर्माण। -रामराज्य की पुन : स्थापना। -शैक्षणिक पाठ्यक्रम में रामायण शामिल करना। -राष्ट्रीय साप्ताहिक अवकाश के रूप में (रविवार के बजाय) गुरुवार घोषित करना। -विश्व ¨हदू दिवस घोषित करना। राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को देंगे मांग पत्र यात्रा के अंत में पांचों उद्देश्यों के लिए दस लाख आमजन और पांच हजार साधु-संतों के हस्ताक्षर एकत्र करेंगे और इसे राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को सौंपेगे। इन बिंदुओं पर सार्वजनिक समर्थन के लिए मिस्ड कॉल अभियान भी शुरू होगा। अयोध्या हो धार्मिक राजधानी देश की राजधानी भले ही दिल्ली रहे मगर भारत की धार्मिक और आध्यात्मिक राजधानी अयोध्या को बनाई जाए। इसके लिए वहां व्यवस्थाएं दी जाएं। यात्रा में शामिल संतों ने एक स्वर से कहा कि अयोध्या ही देश का गौरव है। कश्मीर की राह पर केरल श्रीरामदास मिशन यूनिवर्सल सोसायटी की ओर से निकाली गई यात्रा का नेतृत्व कर रहे शक्ति शांतानंद महर्षि ने कहा कि केरल भी कश्मीर की राह पर है। केरल में ¨हदुओं पर अत्याचार हो रहा है। वहां मंदिरों पर कब्जा किया जा रहा है। अब इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हंडिया में भी हुआ स्वागत हंडिया : रामराज्य रथ यात्रा का हंडिया में भी स्वागत किया गया। यात्रा यहां शाम को पहुंची। स्वागत करने वालों में विहिप के जिला उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार मिश्रा, उपाध्यक्ष आशीष सिंह मोनू, अनुराग पांडेय, एबीवीपी के शिवकुमार तेजस्वी, रामेश्वर तिवारी, सुमित, निखिल, अनुराग, विपिन मिश्रा, बाबा, रोहित, सचिन, बाबा श्याम आदि मौजूद थे।