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प्रयागराज : कुंभ के बाद संगम उपेक्षित सा हो गया है। बुनियादी सुविधाएं समाप्त हो गई हैं। घाट से चेंजिंग रूम हटा लिए गए हैं। इसके कारण महिलाओं को खासी दिक्कत होती है। शौचालय न होने से लोग खुले में शौच को मजबूर हैं।

कुंभ के बाद भी प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने बनाई थी योजना

कुंभ के बाद भी संगम के सरकुलेटिंग एरिया में सुविधाएं देने के लिए प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने योजना तैयार की थी। इसके तहत चकर्ड प्लेटें बिछी हैं। संगम तट पर लाइट भी लगी है पर अन्य सुविधाएं नदारद हो गई हैं। दारागंज निवासी संतोष तिवारी का कहना है कि कुछ मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता है। मसलन, घाटों की नियमित साफ-सफाई करने के साथ ही सुरक्षा के लिए घाटों के आसपास पुलिस तैनात करने की जाए। त्रिवेणी बांध पर रहने वाले आशीष त्रिवेदी का कहना है कि टॉयलेट और यूरिनल की व्यवस्था सबसे आवश्यक है। इसके बिना देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

चेंजिंग रूम हटाने से महिलाओं को हो रही दिक्कत

कुंभ के दौरान स्नान घाटों पर चेंजिंग रूम रखे गए थे, जो अब हटा लिए गए हैं। इसकी वजह से महिलाओं को ज्यादा परेशानी होती है। घाटों पर तितर-बितर दुकानें लगी हैं जिन्हें व्यवस्थित कर दिया जाए तो संगम का सौंदर्य निखर जाएगा। संगम समेत विभिन्‍न गंगा घाटों पर फूल-माला व गंदगी भी दिखने लगी है। लोगों का कहना है कि साफ-सफाई के अभाव में ऐसा हो रहा है।

मंगलवार-शनिवार को उमड़ती है भीड़

वैसे तो संगम पर रोज ही एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचते हैं लेकिन मंगलवार और शनिवार को सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है। त्रिवेणी स्नान के बाद लोग बड़े हनुमान मंदिर में दर्शन-पूजन करते हैं। इसमें निशान चढ़ाने वाले लोगों की तादाद ज्यादा होती है।

खास बातें

01 लाख से ज्यादा रोज संगम स्नान को आते हैं श्रद्धालु

20 हजार औसतन रोज अक्षयवट का दर्शन करते हैं लोग

02 हजार एलइडी फिटिंग अब भी लगी है संगम नोज पर

08 किमी चकर्ड प्लेट की है व्यवस्था संगम सरकुलेटिंग एरिया में

कहते हैं कुंभ मेलाधिकारी

कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद का कहना है कि चुनाव के चलते आचार संहिता लागू है। इस वजह नए कार्यों के लिए टेंडर नहीं हो पा रहे हैं। चेंजिंग रूम और टॉयलेट की व्यवस्था कराई जाएगी।

 

Posted By: Brijesh Srivastava

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