प्रयागराज, जेएनएन। दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने और बेसहारा मवेशियों के नियंत्रण के लिए सरकार ने सैक्ड शार्टेड सीमेन योजना की शुरुआत की है। यह योजना पशुपालकों के लिए है। वह सरकारी पशु अस्पतालों में अपने मवेशियों का कृत्रिम गर्भधान करवा कर नस्ल सुधार के बाद पशुपालन में अच्छा लाभ उठा सकते है। हालांकि पशुपालन विभाग की निष्क्रियता व प्रचार-प्रसार के अभाव में जनपद में यह योजना फ्लाप साबित हो रही है।

पशुपालन विभाग के नोडल अधिकारी ने यह कहा

सरकार के निर्देश पर मार्च 2020 में पशुपालन विभाग दुधारू मवेशियों की नस्ल सुधार व गायों में बछिया पैदा करने के उद्देश्य से सैक्ड शार्टेड सीमेन योजना शुरुआत की थी। पशुपालन विभाग के नोडल अधिकारी डाॅ. यशपाल सिंह ने बताया कि कृत्रिम गर्भाधान के लिए जनपद के 15 पशु चिकित्सालय, 24 पशु सेवा केंद्र तैनात डाॅक्टर व 72 पैरावेट और पशुमित्र कार्यरत हैं। इसके बाद भी बीते सात माह में महज 125 गायों का ही सैक्ड शार्टेड सीमेन से गर्भाधान किया गया है। जबकि इस सीमेन के कृत्रिम गर्भाधान से 90 प्रतिशत साहीवाल नस्ल की बछिया पैदा होने की गारंटी है।

खेतों और सड़कों पर बेसहारा घूमने वाले मवेशियों की संख्या भी घटेगी

यदि साहीवाल नस्ल की गाय का बेहतर ढंग से देखभाल की जाए तो वह एक दिन में 20 लीटर दूध देने की क्षमता रखती हैं। खासतौर पर किसान व पशुपालक को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ साथ इस सीमेन के उपयोग से बछड़ो के पैदा होने में तेजी से कमी आएगी। इससे खेतों और सड़कों पर बेसहारा घूमने वाले मवेशियों की संख्या अपने आप घट जाएगी।

गर्भाधान के लिए 300 रुपये निर्धारित

पशुपालन विभाग ने सैक्ड शार्टेड सीमेन के लिए प्रति मवेशी एआइ (आर्टिफिसियल इंसीमिनेशान) पर 300 रुपये शुल्क निर्धारित किया है। पशुपालक पशु अस्पताल, पशु सेवा केंद्र व पशुपालन विभाग के पैरावेट से संपर्क कर अपने मवेशियों का कृत्रिम गर्भाधान करवा सकते हैं।

बोले, मुख्‍य पशु चिकित्‍साधिकारी

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी बीपी पाठक कहते हैं कि प्रशिक्षण प्राप्त पैरावेट और पशुमित्रों को मवेशियों नस्ल सुधार के लिए सैक्ड शार्टेड सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। महंगा होने से पशुपालक मवेशियों का कत्रिम गर्भाधान कराने से कतराते हैं। इसके लिए पशुपालको को जागरूक किया जाएगा।

 

Edited By: Brijesh Srivastava