प्रयागराज, जेएनएन। कोरोना वायरस को रोकने के लिए दो दिन की बंदी रही। इन दो दिनों में बसों के चक्के थमने से प्रयागराज परिक्षेत्र में प्रतिदिन होने वाली आय जमीन पर आ गई। रेलवे स्टेशन से कुछ बसों के संचालन ने भरपाई का प्रयास किया लेकिन यह आय ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। दो दिनों में करीब 60 लाख का नुकसान हुआ। अब सप्ताह में दो दिन बंदी की घोषणा से आर्थिक संकट और बढ़ेगा। रोडवेज प्रयागराज परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक टीकेएस बिसेन ने बताया कि कोरोना ने रोडवेज का संकट ज्यादा ही बढ़ा दिया है। लॉकडाउन में हमारी बसें खड़ी रहीं। संचालन शुरू जरूर हुआ लेकिन यात्रियों की संख्या बहुत ही कम है। ऐसे में हमारी आय प्रभावित हो रही है।

पांच सौ बसों का बेड़ा

रोडवेज के प्रयागराज परिक्षेत्र में कुल आठ डिपो हैं। जिनमें चार लीडर रोड, प्रयाग, सिविल लाइंस, जीरो रोड शहर में हैं जबकि चार अन्य डिपो मीरजापुर, बादशाहपुर, लालगंज, प्रतापगढ़ हैं। परिक्षेत्र से कई मार्गों पर पांच सौ से अधिक बसों का संचालन होता है। कानपुर, गोरखपुर, फैजाबाद, जौनपुर, वाराणसी, मीरजापुर, लखनऊ व रीवा आदि प्रमुख रूट हैं जिन पर बसें संचालित की जाती हैं। कोरोना संकट के चलते आम दिनों में भी रोडवेज बसों को यात्री नहीं मिल रहे हैं। जिसके चलते करीब ढाई सौ बसें ही रोड पर निकल रही हैं। बाकी बसें वर्कशाप में खड़ी यात्रियों के आने की बाट जोह रही हैं।

खुद कमाना, खुद खाना

रोडवेज का आर्थिक संकट कब खत्म होगा, कोई बताने वाला नहीं है क्योंकि शासन ने कोरोना देखते हुए अब सप्ताह में दो दिन शनिवार और रविवार को बंदी का फैसला लिया है जिससे रोडवेज की आय प्रभावित होगी।

परिवहन निगम को वेतन देने से लेकर डीजल, उपकरण मद में खर्च के लिए बजट का प्रबंध खुद करना होता है। उसके सामने खुद कमाने व खाने वाली स्थिति है। आय थमने पर परेशानी और बढ़ सकती है।

खास बातें

35 से 40 लाख रुपये प्रतिदिन होती है सामान्य आय

05 से 07 लाख रुपये बंदी के दौरान एक दिन में हुई आय

500 से अधिक बसें चलती हैं प्रयागराज परिक्षेत्र से

250 बसें ही वर्तमान में की जा रही हैं संचालित

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