प्रयागराज, जेएनएन : कई बैंकों में दो हजार की नोटों की बड़ी किल्लत है। बाजारों में भी यह नोट बहुत कम नजर आ रही है। नोटों की कमी की वजह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) की ओर से बैंकों में आपूर्ति कम होना और ज्यादातर लोगों द्वारा डंप करना है।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक शाखा के कैशियर का कहना है कि दो हजार की नोट प्रचलन में आने के बाद चार-पांच बार ही बैंकों को दी गई। उसके बाद आरबीआइ ने बड़ी नोट देना बंद कर दिया। जो लोग बड़ी नोट ले गए, डंप कर लिए। इससे नोट की कमी हो गई है। एटीएम में भी छोटी रकम डाली जा रही है। लिहाजा, उससे भी ज्यादातर पांच सौ की नोटें ही निकल रही हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा खुल्दाबाद शाखा के मुख्य प्रबंधक राकेश कुमार का कहना है कि एक महीने से पांच सौ की नोट आई है। आरबीआइ ने बैंकों को जो नोट बांटा, उसे लोगों को दिया गया। लेकिन लोग पांच सौ की नोट ही जमा कर रहे हैं।

इससे नोट की कमी हो गई है। बैंक ऑफ बड़ौदा के एलडीएम ओएन सिंह ने भी माना कि आरबीआइ से दो हजार की नोट कम मिल रही है। हालांकि, एसबीआइ के क्षेत्रीय प्रबंधक जेपी यादव और पीएनबी के क्षेत्रीय प्रमुख पुष्कर तराई दो हजार की नोटों की कमी से इन्कार करते हैं। जेपी यादव कहते हैं कि खाते के जरिए दो हजार की रकम मिलने में कोई दिक्कत नहीं है। 

प्रदेश अध्यक्ष कैट महेंद्र गोयल ने बताया कि दो हजार की जो नोट ट्रेजरी एवं सरकारी खजाने में जमा की गई। उसे आरबीआइ ने बैंकों को वापस नहीं किया। बहुत से लोगों ने दो हजार की नोट को काला धन के रूप में जमा कर लिया है। इससे बाजार में दो हजार की नोट की कमी हो गई है। छोटी नोट बैंक से लेकर आने-जाने में व्यापारियों को असुविधा होती है। 

सिविल लाइंस व्यापार मंडल के अध्‍यक्ष सुशील खरबंदा का कहना है कि व्यापारियों के पास पोस्ट डेटेड चेक (पीडीसी) एक महीने तक लगा रहता है। इसलिए 100, 200, 500 और 2000 की नोट व्यापारी जमा करने के लिए भिजवा देते हैं। जिनके पास किसी तरह का निवेश नहीं है, वह बड़ी नोट रख लेते हैं। इससे बड़ी नोट की कमी जरूर हुई है।

 

Posted By: Brijesh Srivastava

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