प्रयागराज, जेएनएन। यूं तो दशहरा के साथ ही रामलीला का मंचन भी समाप्त हो चुका है। वहीं प्रतापगढ़ में चमझपुर की रामलीला अब शुरू हुई है। अवध राम लीला समिति चमरूपुर शुक्लान में तीस वर्षो से रामलीला का मंचन होता है। दूर-दूर से लोग आकर मंचन देखते हैं।  यहां की रामलीला का अपना अलग ही महत्व है।

चमरूपुर की रामलीला का मंचन इस बार दशहरा के बाद सोमवार से शुरू हो गया है। रामलीला समिति के अध्यक्ष पवन कुमार शुक्ल उर्फ गोलू शुक्ल ने बताया कि यहां की रामलीला का जिले में अपना अलग महत्व है। यह रामलीला लगभग तीसरे दशक की दहलीज पार कर चुकी है। इन तीन दशकों में यह रामलीला समिति तमाम उतार-चढ़ाव से रूबरू होते हुए जन सहयोग से आयोजित की जाती है। इसमें समाज सेवियों एवं जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग मिलता है।

उन्होंने बताया कि रामलीला का मंचन यहीं के कलाकार करते हैं। कलाकार अपनी कलापूर्ण शैली में मंत्रमुग्ध करते हुए लोगों को प्रभावित करते हैं। रामलीला को पूर्व मंत्री राजाराम पांडेय तथा संरक्षक विनोद ओझा का सहयोग मिलता रहा। उनके निधन के बाद रामलीला समिति उतार की तरफ तो उन्मुख होती दिखी। हालांकि जनसहयोग, समाज सेवियों व जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग मिलने से बेहतर स्थिति में है।  समिति के अध्यक्ष पवन कुमार शुक्ल ने बताया कि रामलीला का मंचन एक नवंबर तक होगा।

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