प्रयागराज : कुंभ मेला क्षेत्र में जमीन व सुविधा बंटवारा में अभी कई दिन बाकी हैं लेकिन उसके पहले विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। दंडी संन्यासी गंगोली शिवाला मार्ग पर शिविर लगाने को अड़े हैं। इधर खाकचौक से जुड़े वैष्णवों के दिगंबर, निर्मोही व निर्वाणी अखाड़े के महात्माओं ने माघ मेला में मिले स्थान पर ही शिविर लगाने की मंशा जता दी है। प्रशासन उनकी जगह को 13 अखाड़ों में बांटना चाहता है, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया है।

  इसके मद्देनजर 12 नवंबर को प्रयाग में खाकचौक व्यवस्था समिति की निर्णायक बैठक बुलाई गई है। इसमें प्रस्ताव पारित कर प्रशासन को सौंपकर उसी के अनुरूप कुंभ में जमीन व सुविधा मांगी जाएगी। बांध के नीचे गंगा कटान के चलते उचित जमीन न होने के चलते प्रशासन अखाड़ों को गंगा के पूरब झूंसी की ओर बसाएगा। अखाड़ों का शिविर त्रिवेणी मार्ग में लगेगा। उसके दोनों छोर पर 13 अखाड़ों को जमीन दी जाएगी, जबकि माघ मेला में उसी स्थान पर खाकचौक के महात्माओं, महामंडलेश्वर, महंतों का शिविर लगता है। अगर जमीन बंटी तो उसके महंत, श्रीमहंत, मंडलेश्वर व महामंडलेश्वरों को दूर जाना पड़ेगा। 

 समिति के महामंत्री महामंडलेश्वर संतोष दास 'सतुआ बाबा' कहते हैं कि खाकचौक में तीनों वैष्णव अखाड़ों के सौ से अधिक श्रीमहंत, मंडलेश्वर व महामंडलेश्वरों का शिविर लगता है। माघ की भांति कुंभ मेला में भी उन्हें उसी स्थान पर जमीन व सुविधा मिलती रही है। लेकिन अबकी खाकचौक की परंपरा को खत्म करके दूसरे स्थान पर जमीन दी गई तो यह कुंभ मेला के लिए शुभ संकेत नहीं होगा। इसके मद्देनजर 12 नवंबर को खाकचौक व्यवस्था समिति की बैठक बुलाई गई है, जिसमें सभी मुकामधारी शामिल होंगे।

Posted By: Brijesh Srivastava