प्रयागराज, जागरण संवाददाता। लोक निर्माण विभाग में कर्मियों की भर्ती और प्रमोशन में भ्रष्टाचार हुआ है। पिछले दिनों कई कर्मियों की सर्विस बुक में छेड़छाड़ कर जन्मतिथि बदलने का मामला सामने आया था। उसे विभाग ने गंभीरता से लिया और दो कर्मियों को उनके पुराने दस्तावेज के आधार पर रिटायर किया जा चुका है। अब प्रांतीय खंड के एक कर्मचारी का मामला सामने आया है। इसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर प्रमोशन ले लिया गया है। शिकायत हुई तो इसकी जांच शुरू हो गई है। इसकी निष्पक्ष जांच हुई तो कइयों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाएंगे। यही वजह है कि जांच के नाम से ही तमाम जालसाज घबराए हुए हैं।

अधिशासी अभियंता को सौंपी गई मामले की जांच

लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड में चतुर्थ श्रेणी पद पर सालों पहले एक कर्मचारी भर्ती हुआ। भर्ती होने के कुछ साल बाद उसने लिपिक से मिलीभगत से करके अपने सर्विस रिकार्ड में हेराफेरी की। सर्विस रिकार्ड में पुराने शैक्षिक दस्तावेज को हटाकर दूसरा दस्तावेज लगा दिया। आरोप है कि उस रिकार्ड के आधार पर उसका चतुर्थ श्रेणी कर्मी से वर्क एजेंट में प्रमोशन मिल गया। वर्क एजेंसी बनने के बाद लाखों रुपये का एरियर भी लिया। इस खेल में लिपिक और अधिकारी की भी मिलीभगत रही। पिछले दिनों किसी ने लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारियों से शिकायत की। शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू हो गई है। चूंकि ऐसे मामले विभाग के लगभग सभी खंडों में हुए हैं। इसलिए अधीक्षण अभियंता एके द्विवेदी ने प्रांतीय खंड, निर्माण खंड एक, दो, तीन और चार के अधिशासी अभियंताओं को निर्देशित किया कि विभाग में कार्यरत सभी वर्क एजेंट के रिकार्ड की जांच की जाए। साथ ही इस मसले की रिपोर्ट उन्होंने एक सप्ताह में मांगी है।

- फिलहाल ऐसे किसी मामले की जानकारी नहीं है। अगर उच्च अधिकारियों ने रिपाेर्ट मांगी है तो उसे जांच के बाद जरूर दिया जाएगा।

- संजय कुमार श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड

Edited By: Ankur Tripathi