प्रयागराज, जागरण संवाददाता। बंगाल की खाड़ी में बना कम वायु का प्रभाव अभी खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में मौसम में उतार-चढ़ाव होता रहेगा। सुबह तेज धूप निकलेगी तो दोपहर में बारिश होने की पूरी संभावना रहेगी। कभी भी काले बादल आसमान में छा सकते हैं। अचानक इतनी तेज बूंदें पड़ेंगी कि आप भीग सकते हैं। इसलिए अगले दो दिन घर से बाहर निलकने से पहले इतनी तैयारी से निकलें कि अगर हल्की बारिश हो तो आप भीगें नहीं। बच्‍चे स्कूल जाएं तो उनके पास रेट कोट जरूर रहे। क्योंकि इस बारिश में जो भी भीगेगा उसकी तबीयत खराब हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक 21 सितंबर के बाद मौसम में बदलाव होगा। फिर बारिश होने की संभावना बहुत कम है।

उमस भरी गर्मी कर रही परेशान

प्रयागराज में कई दिन झमाझम बारिश होने के बाद पिछले तीन दिन से मौसम का मिजाज बदला है। तेज धूप निकल रही है। इससे उमस भी बढ़ गई है। अधिकतम पारा भी 35 डिग्री के आंकड़ाें को पार करने की कोशिश में लगा हुआ है। रविवार को पूरे तेज धूप और बादलों के बीच रस्साकशी दिखाई दी। दोपहर साढ़े 12 बजे तक सूरज देवता अपना असर दिखाते रहे। उसके बाद बादले सूरज को पछाड़कर आगे आ गए। अचानक ही बारिश शुरू हो गई। हालांकि तेज हवा चलने पर आधे घंटे में बादल को आगे बढ़ना पड़ा। लोगों ने अनुमान लगा लिया था कि अब तेज बारिश होने वाली है। उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ, बल्कि उमस ने लोगों को और ज्यादा परेशान किया। सोमवार सुबह से आसमान में बादलों और सूर्य के बीच लुकाछिपी चल रही है।

प्रयागराज में आज का अधिकतम व न्‍यूनतम तापमान

रविवार को अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस व न्‍यूनतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। शनिवार को दिन का अधिकतम तापमान 34.2 डिग्री सेल्सियस था, जो रविवार को बढ़कर 34.4 डिग्री हो गया था। शनिवार को न्यूनतम तापमान 25.7 डिग्री था। रविवार को बढ़कर यह 27.1 डिग्री पर पहुंच गया था।

जानें, क्‍या कहते हैं मौसम विज्ञानी

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डा. शैलेंद्र राय का कहना है कि कल यानी 21 सितंबर तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। ऐसे में बारिश होने की पूरी संभावना है। उन्‍होंने बताया कि बारिश लगातार या झमाझम होने की उम्‍मीद कम है, रिमझिम बारिश का अनुमान है।

पिछले दिनों की बारिश से मत्स्य पालकों की परेशानी

पिछले दिनों की लगातार बारिश होने पर जहां किसानों की फसलें खराब हुई, वहीं मत्स्य पालन करने वालों की तो कमर ही टूट गई। क्योंकि तालाब में अचानक पानी बढ़ जाने से तालाब की मछली बहकर बाहर निकल गईं। कई जगह तो बाहर की खराब मछली तालाब में आ गईं। अब मत्स्य पालकों को यह समझ नहीं आ रहा है कि उनके तालाब में मछली की संख्या कितनी है, कितना दाना तालाब में डालना है। यमुनापार रहने वाले मत्स्य पालक उमेश बताते हैं कि इस बारिश से उन्‍हें नुकसान हुआ है अब चिंता सता रही है कि मछली बेचने पर लागत भी मिलेगी या नहीं।

Edited By: Brijesh Srivastava