प्रयागराज, जागरण संवाददाता। सशक्तीकरण की ओर बढ़ रही नारी अब पुरुषों के वर्चस्व वाले कामों को हथियाने जा रही है। गांवों में होने वाले विकास कार्यों का आधी आबादी पूरा ठेका लेगी। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं महिलाएं गांव में नाली, खड़ंजा व इंटरलाकिंग निर्माण से लेकर हैैंडपंप रिबोर समेत अन्य काम कराएंगी। उन्हें इन कार्यों का ठेका देने में प्राथमिकता दी जाएगी।

ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव चहेतों को नहीं दे सकेंगे विकास कार्यों का ठेका

खास बात यह कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद प्रधान और सचिव अपने चहेतों को ठेका नहीं दे सकेंगे। अभी तक प्रेरणा कैंटीन, कोटे की दुकान का संचालन करने वाली ये महिलाएं सीआइबी (सिटिजन इनफार्मेशन बोर्ड) यानी आमजन सूचना पट व इंटरलाकिंग के लिए सीमेंटेड ब्रिक का प्लांट लगाने लगी हैं। इससे महिला समूहों को करोड़ों रुपये का लाभ मिलने लगा है। गांवों में जो भी कार्य कराए जाते हैैं, उसके बारे में जानकारी के लिए सूचना पट आवश्यक लगाए जाते हैैं। पहले यह कार्य ठेकेदार कराते थे।

पक्के निर्माण के काम में महिलाओं को प्राथमिकता

इसके अलावा महिलाएं स्कूल के बच्चों का यूनिफार्म सिलकर आपूर्ति करने लगी हैैं। गांवों में जो विभिन्न कार्यों के लिए प्रयोग होने वाली सामग्री की आपूर्ति भी कर रही हैैं। अब पक्के कार्य और निर्माण भी कराएंगी। इसके लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन (ग्रामीण) ने पहल किया है।

आजीविका मिशन के जिला मिशन प्रबंधक शरद कुमार का कहना है कि गांवों में जो भी विकास कार्य कराए जाते हैैं वह समूहों को दिए जाने की तैयारी चल रही है। हर ब्लाक में तैनात मिशन मैनेजर इसकी मानीटरिंग करेंगे। गांवों में होने वाले कार्यों के लिए इन्हीं समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी। जिले में लगभग ढाई महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैैं। यहां 22 हजार से ज्यादा समूह गठित हो चुके हैैं।

सीडीओ ने यह कहा

गांवों में विकास कार्यों का ठेका महिला स्वयं सहायता समूहों को दिए जाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए महिलाओं को पहले प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे गांवों के विकास मेें तेजी तो आएगी ही, पारदर्शिता भी दिखेगी।

शिपू गिरि, सीडीओ

Edited By: Ankur Tripathi