प्रयागराज, [अमरदीप भट्ट]। संगम की रेती पर माघ मेला का आयोजन अनादि काल से होता रहा है, आगे भी होगा। सन 2020 का माघ मेला इकलौता ऐसा आयोजन रहा जिसने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण की राह आसान करने में पूरी भूमिका बनाई। दो दिनी संत सम्मेलन, विहिप के प्रस्तावित श्रीराम मंदिर मॉडल का प्रदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मेला क्षेत्र में प्रमुख धर्माचार्यों से मुलाकात के बाद ट्रस्ट राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र न्यास का गठन भी माघ मेला के रहते हुआ। श्रीराम मंदिर अयोध्या के इन महत्वपूर्ण पहलुओं में अगुवा रहते हुए यह माघ मेला हमेशा के लिए यादगार बन गया।

माघ मेला-2020 का जिक्र भी किसी इतिहासकार की कलम से जरूर होगा

श्रीराम मंदिर (अयोध्या) के निर्माण का जब भी इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें तमाम धार्मिक पेंच और लंबी कानूनी प्रक्रिया के साथ प्रयागराज का नाम भी स्वर्ण अक्षरों में रहेगा। यानी माघ मेला 2020 का जिक्र भी किसी इतिहासकार की कलम से जरूर होगा। वजह कई हैं, सबसे प्रमुख तो यह है कि माघ मेले में पहले भी श्रीराम जन्म भूमि आंदोलन को लेकर धर्म संसद होती रही हैं।

संत सम्मेलन ग्रैंड फिनाले साबित हुआ

इस बार माघ मेला में 20 और 21 जनवरी को हुआ संत सम्मेलन इसका ग्रैंड फिनाले साबित हुआ। इसमें पहले दिन पहले सत्र की अध्यक्षता स्वामी वासुदेवानंद ने की थी। वहीं प्रस्तावना विहिप के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने की थी। 29 जनवरी को उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, श्रीराम मंदिर न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, स्वामी वासुदेवानंद से मुलाकात कर संकेत दिए थे कि माघ मेले के दौरान ही श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बन जाएगा।

आखिर पीएम ने 15 सदस्‍यीय ट्रस्‍ट के गठन की घोषणा की

आखिर पांच फरवरी को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 सदस्यीय ट्रस्ट के गठन की घोषणा कर दी। इससे माघ मेला 2020 में हुए संत सम्मेलन का उद्देश्य सफल हुआ और रविवार को माघी पूर्णिमा से संपन्न हुए मेले से देश वासियों की यादें भी जुड़ गईं।

Posted By: Brijesh Srivastava

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