प्रयागराज, जेएनएन। लखनऊ के रीयल एस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल को देवरिया जेल ले जाकर पीटने और दस्तावेजों पर जबरन दस्तखत कराने के मामले में अब पूर्व सांसद अतीक के बेटे उमर पर भी शिकंजा कस सकता है। लखनऊ की कृष्णानगर थाने की पुलिस ने एफआइआर में नाम होने के बावजूद उमर का नाम हटाकर आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट लगाई थी। इस पर सवाल उठे थे। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच कर रही सीबीआइ शायद ही किसी को बख्शेगी।

जेल में पिटाई की घटना में दर्ज है केस
देवरिया जेल ले जाकर पीटने की घटना में रीयल एस्टेट कारोबारी मोहित की शिकायत पर 28 दिसंबर 2018 को कृष्णा नगर थाने में छह नामजद समेत 10-12 अज्ञात पर मुकदमा लिखा गया था। कृष्णानगर पुलिस ने विवेचना में अतीक को साजिश रचने और साले जकी अहमद, फारूख, गुलाम सरवर, जफरउल्ला समेत आठ लोगों के खिलाफ अपहरण, पिटाई समेत अन्य धाराओं में चार्जशीट लगाई थी। नामजद एफआइआर के बावजूद उमर का नाम चार्जशीट में नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआइ ने 12 जून को नया केस दर्ज किया है जिसमें अतीक और उनके करीबियों समेत उमर का भी नाम है।

सीबीआइ टीम की अतीक के ठिकानों पर हुई थी छापेमारी
बुधवार को अतीक के ठिकानों पर दिन भर चली छापेमारी के दौरान सीबीआइ के अधिकारियों ने अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन से बेटे उमर के बारे में भी कई सवाल किए थे। वह क्या पढ़ाई कर रहा है, दिल्ली में कहां रहता है, उसके मोबाइल नंबर की जानकारी ली। उमर के कमरे की भी सीबीआइ टीम ने तलाशी ली थी। उसके लैपटाप और मोबाइल के बारे में सवाल किए थे। सीबीआइ के इन सवालों से भी घरवालों को आभास हो गया है कि उमर पर अब शिकंजा कसा जाएगा।

पुलिस अधिकारी बोले, उमर को छिपाया गया है
करीबियों का कहना है कि अहमदाबाद जेल में बंद अतीक की बेगम शाइस्ता परवीन की तबीयत बेटे उमर की चिंता में ही बिगड़ गई। अब यहां पुलिस अधिकारी भी कह रहे हैं कि उमर पढ़ाई के लिए नहीं गया है बल्कि छिपाया गया है। लखनऊ में कृष्णा नगर पुलिस ने तो अतीक के बेटे उमर समेत कई लोगों को बचा लिया लेकिन सीबीआइ से कोई राहत नहीं मिलेगी। सवालों के घेरे में पुलिस की जांच -सीबीआइ जांच में कृष्णा नगर पुलिस की विवेचना भी घेरे में आनी तय है। मुकदमा लिखाने वाले मोहित जायसवाल का कहना था कि अपहरण से लेकर जेल में पिटाई तक में उमर भी शामिल था लेकिन पुलिस ने उसका नाम चार्जशीट से हटा दिया। बाकी के खिलाफ सुबूत मिले तो उमर की मौजूदगी के साक्ष्य कैसे नहीं मिले।

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